Annihilation Of Caste in Hindi PDF Book Download Free [2024]

आज की इस पोस्ट में हम आपको Annihilation Of Caste in Hindi PDF उपलब्ध करवाने वाले है, जिसे आप पोस्ट में दिए गए Download Link की सहायता से आसानी से Download कर सकते है।

तो दोस्तों अगर आप भी जाती का विनाश बुक पीडीऍफ़ को डाउनलोड करना चाहते हो तो आप एकदम सही पोस्ट पर आये हो क्योकि आज की इस पोस्ट में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के द्वारा लिखित पुस्तक Annihilation Of Caste उपलब्ध कराई है।

तो दोस्तों सबसे पहले जान लेते है की Annihilation Of Caste in Hindi में क्या होता है। तो Annihilation Of Caste का हिन्दी में अर्थ ”जाति का उन्मूलन/जाती प्रथा का विनाश” होता है। जाती प्रथा का विनाश ग्रंथ देश प्रसिद्ध ग्रंथो में से एक है। इस ग्रथं के प्रकाशन की बात करे तो सन 1936 में हुआ था। हमारे देश में स्वतंत्रा से पूर्व पिछड़े वर्ग के लोगो पर बहुत सारे हत्याचार होते थे।

उस समय के नेताओ के द्वारा निम्न जाती के लोगो का पर ध्यान नहीं दिया जाता था और जो जातीय व्यवस्था थी वह भी बिल्कुल सही नहीं थी। इनके खिलाफ आवाज उठाने के लिए डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने एक भाषण तैयार किया था जिसमे नेताओ के विरोध किया गया था और जातीय व्यवस्था पर सवाल उठाये थे।

Annihilation Of Caste in Hindi PDF Overview

PDF Title Annihilation of Caste in Hindi
Category Book
Language 3.2 MB
PDF Size Hindi
Total Pages 86
Download LinkAvailable
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Annihilation Of Caste By Ambedkar Pdf

Annihilation Of Caste in Hindi PDF

दोस्तों अब आप लोगो को Annihilation Of Caste Meaning in Hindi के बारे में अच्छे से समझ में आ गया होगा। तो चलिए अब इस बुक के बारे में अन्य जानकारी को विस्तार से जान लेते है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर के द्वारा जो भाषण तैयार किया गया था उसको सार्वजानिक रूप से लोगो के सामने बोलने से मना कर दिया था और इस भाषण में बदलाव करने को कहा गया।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर को भाषण लिखने का न्योता लाहौर के जात पात तोड़क मंडल की ओर से मिला था और यह भाषण उनकी वार्षिक कान्फ्रेंस में मुख्य भाषण करने के लिए कहा गया था। इस भाषण को डॉ. भीमराव अम्बेडकर के द्वारा न्यौता मिलने के बाद तैयार किया गया था।

जब डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा भाषण को तैयार करके भेजा गया तो तोड़क मंडल के कर्ताधर्ता ब्राह्मणो के प्रभुत्व वाले जात-पात के लोगो ने यह भाषण सुनने को इंकार कर दिया। इस भाषण को लेकर आपस में काफी बेहस भी हुई।

इस बहस के बाद आयोजकों ने निर्णय लिया की आयोजकों के द्वारा मर्जी से इस भाषण में बदलाव किया जायेगा लेकिन डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने इसके लिए मना कर दिया और डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने इस सामग्री को लोग तक पहुंचाने के लिए एक बुक लिखने का निर्णय लिया फिर उन्होंने इस सामग्री को बुक के रूप में मई 1936 को प्रकाशन किया गया।

स्वतंत्रता से पूर्व धर्म परिवर्तन आम बात थी और बहुत सारे लोग धर्म परिवर्तन इस कारण से करते थे की कंही उन पर हत्याचार नहीं हो। उस समय पर लोग जातीय भेदभाव बहुत अधिक करते थे और निम्न जाती के लोगो पर बहुत अधिक अत्याचार करते थे इस सभी से बचने के लिए लोग अपना धर्म परिवर्तन करते थे।

अगर कोई इस्लामिक धर्म में था तो उन साथ अच्छा व्यवहार किया जाता था। यदि हम भी किसी धर्म को मानते थे तो लोगो के द्वारा धर्म परिवर्तन की धमकी भी दी जाती थी और नेताओ के द्वारा उन लोगो पर दबाव डाला जाता था जिससे की वे भी अपना धर्म परिवर्तन कर ले।

इन सभी लोगो के खिलाफ डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवाज उठाने लगे थे और डॉ. भीमराव अम्बेडकर एक अछूत नेता थे और यह सभी घटनाएं डॉ. भीमराव अम्बेडकर के सामने होती थी।

लोग अपनी जाती को जातीय कलंक मानने लगे थे। जब भारत पर मुस्लिमों का अधिकार था तो लोगो के द्वारा मुस्लिमो के अत्याचारों से बचने के लिए बहुत सारे लोगो ने इस्लाम अपना लिया था।

फिर बाद में बहुत सारे लोगो ने सिख और ईसाई धर्म अपना लिया था। यह बहुत दुखद कि बात है की भारतीय उपमहाद्वीप में जातिय पूर्वग्रह धार्मिक विश्वास पर हावी रहा है।

महिलाओ को हमेशा आगे आने से रोका जा रहा था। हिन्दू धर्म के लोगो के द्वारा बड़े पैमान पर धर्म परिवर्तन किया गया जिसका उदाहरण हमे इतिहास की पुस्तको में देखने को मिलता है।

इससे जुडी बहुत सारी जानकारी आपको इस बुक के माध्यम से मिलेगी इस बुक को काफी लोगो द्वारा पसंद किया गया था और इस बुक को पढ़ने के बाद आपके मन में भी एक नई ऊर्जा जाग्रत होगी और आप भी जातीय भेदभाव के खिलाफ अपनी आवाज उठा सकते हो।

बहुत सारे लोगो के मन एक सवाल जरूर आता होगा की अंबेडकर ने हिंदू धर्म को क्यों छोड़ा? इसके बारे में जाने तो धर्म मनुष्य के लिए है न कि मनुष्य धर्म के लिए। डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने 13 अक्टूबर 1935 को घोषणा में बताया की वे हिन्दू धर्म को छोड़ रहे है उन्होंने उस धर्म में रहना पसंद किया जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की भावना सीखाता हो।

उनके अनुसार समाज में जाति प्रथा के चलते हिंदू धर्म में इन तीनों गुण का अभाव था। ऐसे में डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को 3.65 लाख समर्थकों के साथ हिंदू धर्म को छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया था।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने हिंदू धर्म में जो व्याप्त वर्ण व्यवस्था चल रही थी उसको खत्म करने के लिए सामाजिक के साथ कानून लड़ाई तक लड़ी। लेकिन जब उनको यह लगा की यह सब बहुत मुश्किल है और जो भी प्रयास किए वह सब विफल रहे। तब उन्हें भी लगा की हिन्दू धर्म में इस सब को खत्म नहीं किया जा सकता है।

फिर उन्होंने एक भाषण में कहा की समान अधिकार और सम्मानजनक जीवन चाहते हैं तो धर्म परिवर्तन ही एक मात्र रास्ता है। और उन्होंने कहा की “मैं हिंदू के रूप में पैदा हुआ हूं, लेकिन हिंदू के रूप में मरूंगा नहीं, कम से कम यह तो मेरे वश में है”

Conclusion

दोस्तों उम्मीद करता हूँ की Annihilation Of Caste in Hindi PDF आसानी से डाउनलोड कर ली होगी और Ambedkar Books in Hindi Pdf के बारे में अच्छे से समझ में आ गया होगा। अगर डॉ भीमराव आंबेडकर की बुक्स इन हिंदी पोस्ट पसंद आई हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।

दोस्तों अगर Annihilation of Caste book PDF free download करने में कोई समस्या हुई हो तो आप हमें कमेंट में जरूर बताए।

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