अमर शहीद भगत सिंह की जीवनी – Bhagat Singh Biography in HIndi

दोस्तों भारत की महान हस्ती अमर शहीद भगत सिंह जी जिन्होंने अपने जीवन में काफी संगर्ष किया और अपने जीवन के सारे सुख त्याग कर अपने देश के सुख के बारे में सोचा।

और बहुत ही कम उम्र (लगभग 14 वर्ष) में क्रन्तिकारी संस्थाओ में काम करने लगे। उनका बस एक ही सपना था ब्रिटिश सरकार का डटकर सामना करना। और इसके लिए उन्होंने इन संस्थाओ से काफी सारा ज्ञान और साहस अर्जित किया।

तो दोस्तों आज हम एक बहुत ही बड़े देशभक्त भगत सिंह की जीवनी पर प्रकाश डालने वाले हैं। जिससे आप भारत के वीर योद्धा के जीवन से परिचित हो सके।

शहीद भगत सिंह की जीवनी- Bhagat singh biography in hindi

शहीद भगत सिंह की सामान्य जानकारी- (biography of bhagat singh in hindi)

  • भगत सिंह का जन्म कब हुआ था- भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब प्रांत के लायलपुर जिले के बावली गांव में हुआ था जब पाकिस्तान में था।
  • पिता: सरदार किशन सिंह
  • माता: विध्यावती कौर
  • चाचा: सरदार अजीत सिंह
  • निधन: 23 March 1931, लाहौर जेल पंजाब, जो अब पाकिस्तान में हैं।
  • आंदोलन: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम

आज हम बात करने वाले हैं स्वाभिमान आत्मविश्वास त्याग और बहादुरी की मिसाल जो देश के लिए त्याग और बलिदान की भावना रखते थे जिन्होंने अपने प्राण का न्योछावर देश के लिए कर दिया। एक महान क्रांतिकारी जिनके त्याग और बलिदान को आज भी इस देश की मिट्टी बयां करती हे। हम बात कर रहे हैं शहीद भगत सिंह के बारे में, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक हे। मात्र 24 साल की उम्र में हंसते-हंसते देश के लिए फांसी पर चढ़ गए थे।

तो आज हम उन्हीं महान क्रांतिकारी भगत सिंह की जीवनी के बारे में, जिनके बारे में आज सभी जानते हैं परंतु कुछ ऐसी बातें हैं जो शायद आप नहीं जानते हैं।(bhagat singh in hindi essay) अगर आप इस निबंध को पूरा पढ़ते हैं तो आप भगत सिंह के बारे में आसानी से सब कुछ जान पाएंगे और अपने जीवन के लिए भी प्रेरणा ले पाएंगे। Bhagat Singh Biography in Hindi.

भगत सिंह का जन्म singh परिवार में हुआ था। बचपन से ही अंग्रेजों के प्रति उनका आक्रोश पनप रहा था। वे बचपन से बहुत बहादुर और साहसी रहे जो हम आगे इनके बचपन के बारे में जानेंगे। भगत सिंह भारत माता को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराना चाहते थे उन्होंने यूरोपियन क्रांतिकारी आंदोलन के बारे में पढ़ा और जाना जिससे यह समाजवाद राष्ट्रवाद की और आकर्षित हुए थे।

हालाँकि ब्रिटिश सरकार की तरफ से तो इन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया था परंतु सरदार Bhagat singh खुद आतंकवाद के आलोचक रहे थे। उनका बस यही लक्ष्य था की ब्रिटिश सरकार का नाश करना और अपनी मातृभूमि की रक्षा करना, भगतसिंग ने भारत के क्रांतिकारी आंदोलन में एक नई दिशा दी थी। इनका पूरा परिवार वीर और साहसी था। तो चलिए ऐसे वीर योद्धा की (biography of bhagat singh in hindi) जीवनी हिंदी में संक्षिप्त में जानने की कोशिश करते हैं।

प्रारंभिक जीवन/ बचपन (bhagat singh ki kahani)

शहीद भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को बावली (बंगा) गांव, Jranvala तहसील, Lyallpur जिले के पंजाब प्रांत में हुआ था। जो वर्तमान में पाकिस्तान का क्षेत्र है क्योंकि जब भारत पाकिस्तान एक ही देश थे जिसे अंग्रेजों ने अपना गुलाम बनाया हुआ था। भगत सिंह के बहादुर होने से इनसे बड़ी उम्र वाले बच्चे भी इन से डरते थे। अपने पिता के साथ खेत पर आया जाया करते थे एक दिन उन्होंने अपने पिता से पूछा कि आप यहां खेत में क्या करते हो, तो उन्होंने बताया कि हम इस में बीज बोते हैं फसल होती है अनाज होता है जिसे हम आराम से खाते हैं अपना जीवन सरल तरीके से निकाल पाते हैं।

भगत सिंह ने वापिस एक सवाल अपने पिता से किया कि ऐसा है तो आप खेत में बंदूकें क्यों नहीं बोते हो। इन्होनें अपने पिता से कहा कि अगर आप बंदूके भी बोते होते तो आज हमारे काम आती और हमारे पास ढेर सारी बंदूकें भी होती जिससे हम निडर तरीके से अंग्रेजों का सामना कर पाते जब एक पिता ने अपने पुत्र के मुंह से यह बात सुनी तो वो एक बार तो पिलर की तरह थमे रह गए थे। थोड़ी देर बाद उनको खुशी भी हुई कि उनका बेटा राष्ट्रवाद की ओर आगे बढ़ रहा है और देश भक्ति की राह पर चल रहा हे।

बचपन से ही उनके मन में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी जो हमने अभी (Bhagat singh ki kahani) इस कहानी के माध्यम से समझा हे। लाहौर के डीएवी विद्यालय से अपनी पढ़ाई कर रहे थे। तभी से भगत सिंह, लाला लाजपत राय और राय बिहारी जैसे क्रांतिकारियों के संपर्क में आये थे। और उन्होंने रैलियों मोर्चा में भाग लेना प्रारंभ कर दिया था तो चलिए हम इनके बारे में विस्तार से जानने का प्रयास करते हैं।

भगत सिंह का क्रन्तिकारी जीवन {bhagat singh history in hindi}

यह बात है उस समय की जब इनके के घर में इनके विवाह को लेकर माहौल चल रहा था। परंतु भगत सिंह विवाह नहीं करना चाहते थे, क्योंकि ये एक सच्चे क्रांतिकारी की दिशा में जाना चाहते थे। विवाह से बचने के लिए अपने घर से भागकर कानपुर की ओर चले गए थे, और इन्हें वहीं से पहला क्रांतिकारी का पाठ पढ़ने को मिला। कानपुर जा कर यह गणेश शंकर विद्यार्थी जो क्रांतिकारी इनके संपर्क में आए, और वही से क्रांतिकारी दिशा की और बढ़ना प्रारंभ कर दिया। Bhagat Singh Biography in Hindi.

कुछ समय बाद उनके गांव से खबर आई कि उनकी दादी जी बहुत बीमार है तब वे वापस अपने गांव लौट गए, और गांव में ही अपने क्रांतिकारी गतिविधियों को जारी रखा। आगे उन्होंने कई क्रांतिकारी संगठन बनाएं, कई रैली मोर्चे इन सब में भाग लिया ,पंजाब में क्रांति का संदेश फैलाया। इनका मुख्य उद्देश्य हिंसात्मक तरीके से गणतंत्र की स्थापना करना और भारत माता को स्वतंत्र कराना था।

Bhagat Singh Biography in Hindi

1 अगस्त 1920- यह तारीख तो सभी को पता होगी जब महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की थी। गांधीजी अहिंसा के मार्ग पर चलते थे, और अपने पूरे जीवन काल में इसी मार्ग पर चलते आये थे। असहयोग आंदोलन के तहत गांधी जी ने कहा था कि ,कोई भी हिंदुस्तानी ब्रिटिश सरकार का साथ ना दे ,गांधी जी के कहने का तात्पर्य था कि अगर कोई भी हिंदुस्तानी युवा नौकरी नहीं जाएंगे बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे तो ब्रिटिश सरकार को कोई फायदा नहीं होगा और हिंदुस्तानियों को टैक्स भी नहीं भरना पड़ेगा, अर्थात गांधीजी के अनुसार सभी युवा सभी बच्चे सभी को अंग्रेजों का साथ देना छोड़ना होगा।

गांधीजी के अनुसार विदेशी वस्त्रों का, विदेशी वस्तुओं का, कोई भी हिंदुस्तानी उपयोग ना करें और हम सभी स्वदेशी की ओर बढ़े। भगत सिंह के परिवार वाले इनके विचारों से बहुत सहमत थे और बहुत छोटी उम्र में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से भगतसिंह जुड़ गए थे। भगत सिंह ने आंदोलन में बहुत बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया, रैलियों में भाग लेने लगे थे और गांधी जी के कहने पर British सरकार की बुक्स वस्त्र सभी जला दिए थे।

5 फरवरी 1922- गोरखपुर जिले के चोरी-चोरा नामक स्थान पर जुलूस निकल रहा था। पुलिस ने जबरन इस जुलूस को रोकना चाहा, जिससे जनता मैं पूरी तरह आक्रोश फैल गया और हर किसी के चेहरे पर आक्रोश दिखने लगा था। जनता ने अपनी नाराजगी को दिखाते हुए एक थाने में आग लगा दी जिससे एक थानेदार व 21 सिपाहियों की मौत हो गई थी और इस घटना से गांधी जी बहुत नाराज हुए थे और यही वह घटना थी जिससे नाराज होकर गांधी जी ने अपना असहयोग आंदोलन पुनः ले लिया।

गांधीजी ने यह कहकर अपना असहयोग आंदोलन वापस ले लिया की अभी स्वतंत्रता के लिए हमारा देश तैयार नहीं है। असहयोग आंदोलन बंद कर देने पर भगत सिंह के मन में क्रोध उत्पन्न हो गया लेकिन पूरे राष्ट्र की तरह वो भी गांधी जी का सम्मान करते थे। और भगत सिंह ने यहीं से गांधी जी के अहिंसात्मक आंदोलन की जगह हिंसात्मक आंदोलन अपनाया। इन्होंने कई रैलीयो में भाग लेना प्रारंभ किया और कई क्रांतिकारी दलों के सदस्य बने। इनके साथ प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ,सुखदेव और राजगुरु थे।

महत्वपूर्ण तारीखें

9 अगस्त 1925- यह वह दिन था जब भारतीय क्रांतिकारियों ने यह सोच लिया था कि हमें अंग्रेजों से लड़ना है। जिसके लिए भारतीय क्रांतिकारियों को हथियारो की जरूरत थी। तो भारतीय क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सरकार का खजाना लूटने की योजना बनाई। और इसी योजना के तहत भारतीय क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सरकार का खजाना लूटा जिसमें बहुत सारे हथियार जब्त किए। यह वही दिन है जिसे आज हम काकेरी कांड के नाम से जानते हैं।

इसमें बहुत सारे भारतीय क्रांतिकारी पकड़े गए ,जिसमें 4 क्रांतिकारियों को फांसी दे दी और 16 क्रांतिकारियों को 4 साल से आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस बात से भगत सिंह बहुत ही क्रोधित हुए थे। जिससे उन्होंने 1928 में अपनी पार्टी नौजवान भारत सभा को Hindustan Republic associate मे विलय कर दिया था। और उसका नाम परिवर्तित कर Hindustan sociallist Republican Association रख दिया था।

30 अक्टूबर 1928- 1928 Simon Commission इंग्लैंड से भारत आया था। साइमन कमीशन भारत दौरे का मुख्य उद्देश्य यही था कि भारतीय लोगों की राजतंत्र में हिस्सा लेना। परंतु कोई भी भारतीय इनके साथ नहीं था सभी भारतीय उनके खिलाफ थे। और इसी कारण Simon Commission के विरोध में रेलियाँ निकाली गई और Simon Commission go back के नारे लगाए। साइमन कमीशन में लाहौर में भगत सिंह ने भी हिस्सा लिया था। और इस रैली में ब्रिटिश सरकार द्वारा बूरी तरह लाठीचार्ज किया गया और इस लाठीचार्ज के दौरान लाला लाजपत राय बुरी तरह घायल हो गए थे। Bhagat Singh Biography in Hindi.

17 नवंबर 1928- लाठीचार्ज के दौरान हुई चोटों से लाला लाजपत राय की 17 नवंबर 1928 को मृत्यु हो गई और इनकी मृत्यु से देश की मिट्टी भी गम में डूब गई थी। इनकी मौत से भगत सिंह बहुत ही क्रोधित हुए और इनकी मौत का बदला लेना चाहते थे। लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए British Adhikari Scott जो British Suprintendent of Police था। और यही लाला राजपत राय की मौत का जिम्मेदार भी था। भगत सिंह ने लाला लाजपत राय की मौत के बाद उस को मारने का संकल्प लिया।

17 दिसंबर 1928- यह वह दिन था जब भगत सिंह ने अपने संकल्प के मुताबिक Scout को मारने के लिए लाहौर कोतवाली पर राजगुरू, जय गोपाल ,चंद्रशेखर आजाद के साथ वहां तैनात हुए। स्कॉट को मारने के लिए भगत सिंह और राजगुरु ने गोली चलाई थी परंतु स्कोट की जगह गोली Sondars को लग गई। यह भी उसी गैंग का सहायक अधीक्षक था। इस प्रकार भगत सिंह राजगुरु ने लाला लाजपत राय की मौत का बदला लिया और वहां से भाग निकले। इसके बाद भगत सिंह ने अपने दाढ़ी और बाल कटवा लीए जिससे उन्हें कोई पहचान ना पाए। और मौत की सजा से बचने के लिए भगत सिंह को लाहौर छोड़ना पड़ा था।

8 अप्रैल 1929- ब्रिटिश सरकार भारतीयों को अधिकार व आजादी देने की बजाय उनका दमन शोषण करते थे। ब्रिटिश सरकार पूरी तरह मजदूरों का शोषण कर रही थी और उन्हें मजदूरों-गरीबों के दुख से कोई लेना-देना नहीं था बस उन्हें राजतंत्र अपनी सत्ता से मतलब था। और ब्रिटिश सरकार ने अंग्रेजी पुलिस वालों को बहुत से अधिकार दे दिया जिसमें दमनकारी का अधिकार भी शामिल था इसके तहत वे किसी भी संदिग्ध को या रैली मोर्चे सभी को रुकवा देते थे। ब्रिटिश सरकार मजदूर विरोधी बिल पारित करना चाहती थी और सभी को यह सुचना भेजी कि यह जनता के हित के लिए है।

भगत सिंह चंद्रशेखर को यह मंजूर नहीं था कि पहले से गुलामी कर रहे मजदूरों की निजी और आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब है उसके बाद वे मजदूर बिल कहां से भर पाएंगे और इन्होंने एक निर्णय लिया की मजदूर विरोधी बिल ब्रिटिश संसद में पारित नहीं होना चाहिए। भगत सिंह का कहना था कि हमें ब्रिटिश सरकार को बताना होगा की हिंदुस्तानी जाग चुके हैं और हर सोते हुए ब्रिटिश को जगाना होगा।

और अंग्रेजों को पता चलाने के लिए कि हिंदुस्तानी जाग चुके हैं उन्होंने और बटुकेश्वर दत्त ने मिलकर दिल्ली की असेंबली में बम फेंके इनका मकसद किसी की जान लेना नहीं था बस अंग्रेजों को यह दिखाना था कि हर एक हिंदुस्तानी अब जाग चुका है और इस बिल का विरोध करना था। इसलिए खाली जगह देखकर बम फेंके गए थे ऐसा स्थान पर बम फेंका जहां पर कोई नहीं था इनका यह मकसद बिल्कुल भी नहीं था कि किसी को चोट पहुंचाना और मारना बम फेकने से पूरा स्थान धुए में हो गया। बम फेंकने के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए थे। और बम फेंकने के बाद स्वयं अपनी गिरफ्तारी दी थी यह चाहते तो भाग सकते थे परंतु इन्होंने भागने से मना कर दिया और वही जोर-जोर से इंकलाब जिंदा बाद के नारे लगाने लगे और कुछ समय बाद ब्रिटिश पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया।

भगत सिंह बटुकेश्वर दत्त को एक ही जेल में रखा गया और वहां उन्होंने देखा था कि अंग्रेज और भारतीयों में काफी भेदभाव किया जाता है अंग्रेजो को स्वच्छ खाना दिया जाता था उनकी रसोई भी अलग थी जबकि भारतियों लोगों को सूखा खाना दिया जाता था तथा इनकी रसोई में चूहे घूम रहे थें। वहां हिंदुस्तानी कैदियों के लिए कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं थी तभी भगत सिंह ने सोच लिया था कि जब तक अंग्रेजों और हिंदुस्तानी कैदियों के मध्य बराबर व्यवहार और एक जैसा व्यवहार नहीं किया जाएगा तब तक वो खाना नहीं खाएंगे वहां अंग्रेजी के लिए पढ़ने लिखने के लिए अखबार हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध थी परंतु हिंदुस्तानी के लिए अखबार कागज पेन कुछ भी नहीं थे।

जून 1929- भूख हड़ताल शहीद भगत सिंह का महा क्रांतिकारी जीवन यहीं से प्रारंभ हुआ था। भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त दोनों ने मिलकर जून 1929 से भूख हड़ताल की शुरुआत की इस भूख हड़ताल के बाद जब तक भारतीय और अंग्रेजी कैदियों के मध्य एक जैसा व्यवहार नहीं किया जाता तब तक यह दोनों अन का एक निवाला तक नहीं लेंगे । इनकी भूख हड़ताल तुड़वाने के लिए इन्हें बहुत कष्ट दिए गए बर्फ की सिल्ली पर लिटा कर इन्हें घंटों तक पीटा जाता था। जबरदस्ती दूध खाना इनके मुंह में दिया जाता था लेकिन इन्होंने एक बूंद तक अपने शरीर में नहीं जाने दिया। कुछ समय बाद भगत सिंह को लाहौर जेल में भेज दिया था जहां इनके बाकी साथी सुखदेव, राजगुरु ,जितेंद्र नाथ इनको भी रखा गया था। भगत सिंह को देखते हुए उन्होंने भी भूख हड़ताल शुरू कर दी और कई दिनों तक पानी भी नहीं पिया था।

13 सितम्बर 1929- इस दिन एक महान क्रांतिकारी जितेंद्र नाथ दास की मृत्यु हुई थी , लगभग 60 दिनों तक कुछ भी नहीं खाया था और भूख हड़ताल के कारण इनकी मृत्यु हो गई थी। इनकी मृत्यु से भगत सिंह को बहुत दुख हुआ था । इनकी मृत्यु के बाद अंग्रेजी सरकार ने इनके सामने घुटने टेक दिए और भगत सिंह की सारी बातों को मान लिया। इनको कागज अखबार सभी प्रकार की सुविधा दी जाने लगी थी। Bhagat Singh और बटुकेश्वर दत्त ने 116 दिनों बाद 5 अक्टूबर 1929 को अपनी भूख हड़ताल को तोड़ी थी। इस हड़ताल के चलते इनका वजन भी काफी कम हो गया था।

भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को फांसी

26 अगस्त 1930- यह वही दिन था जब इन्हें अपराधी घोषित किया गया था। अदालत ने दंड संहिता की धारा 129 ,302, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम धारा 4 और आईपीसी की धारा 120 के अंतर्गत इन्हें अपराधी सिद्ध किया। 7 अक्टूबर 1930 के दिन भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को फांसी की सजा सुनाई गई तथा अन्य सभी क्रांतिकारियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। कहीं अपिले की गई। परंतु अंग्रेज सरकार नहीं मानी। Bhagat Singh Biography in Hindi.

23 मार्च 1931- हालांकि इनके फांसी का दिन 24 मार्च 1931 सुबह का रखा गया था। परंतु भारतीय जनता में भगत सिंह की फांसी को लेकर काफी आक्रोश भरा हुआ था जिससे डरकर ब्रिटिश सरकार ने 23 मार्च 1931 को ही फांसी देने का निर्णय लिया था। जब भगत सिंह ,राजगुरु, सुखदेव को फांसी के लिए ले जाने के लिए अंग्रेजी ऑफिसर इन्हें लेने गया तब इसने भगत सिंह को बताया कि आज आप की फांसी का दिन है मे आपको लेने के लिए आया हूं, तो भगत सिंह ने उनसे कहा कि एक क्रांतिकारी एक दूसरे क्रांतिकारी से मिल तो लें। और कुछ समय बाद उन्होंने बोला ठीक है चलो।

फांसी के समय भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव तीनों मेरा रंग दे बसंती चोला मेरा रंग दे बसंती चोला गीत गाते हुए मस्ती में चल रहे थे। इन्हें फांसी का बिल्कुल भी डर नहीं था और हंसते हंसते चल रहे थे। फांसी के समय खड़े होकर तीनों ने इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए जो चारों और गूंज उठे थे 23 March 1931 श्याम 7:33 pm को इनको फांसी दे दी गई। और यहां भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव तीनों अमर हो गए।

तो यह थी bhagat singh ki kahani जो हम आज घर बैठ कर आराम से सांस ले रहे हैं, जरा सोचिए इन्होंने हमारे लिए कितनी बड़ी कुर्बानी दी हे। दोस्तों आज हमने एक महान क्रांतिकारी के बारे में पढ़ा हे इनके बारे में पूरा सुनकर रूह तक कांप उठती है इसके साथ ही आज के चलते फिरते मंदिर इंडियन आर्मी के जवानों को हृदय की गहराई से अभिनंदन करता हूं और Salute ठोकता हूँ। Bhagat Singh Famous Dialogue in Hindi

हम अपने आप को बहुत खुशनसीब मानते हैं क्योंकि जहां भगत सिंह से शेर हुए वह हिंदुस्तान हमारा है। अगर आपने यह अमर भगत सींग की जीवनी (Bhagat Singh Biography in Hindi) पूरी पढ़ी और इन महान देशभक्तों को दिल से मानते हैं। तो कमेंट में जय हिन्द जरूर लिखें।

इसके साथ ही अमर शहीद भगत सिंह की जीवनी (Bhagat Singh Biography in Hindi) को अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें। जिससे उन्हें भी आज हम जिनकी वजह से सर उठाकर चलते हैं उनके बारे में सही जानकारी मिल सके।

“जय हिन्द”

Tushar Shrimali Jivani jano के लिए Content लिखते हैं। इन्हें इतिहास और लोगों की जीवनी (Biography) जानने का शौक हैं। इसलिए लोगों की जीवनी से जुड़ी जानकारी यहाँ शेयर करते हैं।

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