महाकवि भारत भूषण का जीवन परिचय। Bhushan Biography in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करने वाले हैं लेखक, कवि एवं समालोचक भारत भूषण अग्रवाल के बारे में यह रीतिकाल के मुख्य कवि है इनकी कविताओं में दानवीर, धर्मवीर, व वीर रस का वर्णन मिलता है। इन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से जातीय एकता, हिंदू धर्म, व राष्ट्रीयता आदी का भाव भरा है एवं इसी कारण यह अपने काल के प्रसिद्ध कवि रहे। उन्होंने कई कविताएं तथा ग्रंथ की रचना की है तो चलिए रीतिकाल के महाकवि भारत भूषण के बारे में विस्तार से जानने का प्रयास करते हैं।

महाकवि भारत भूषण का जीवन परिचय (सामान्य)

  • नाम – शिवराज भूषण
  • उपनाम – महाकवि भारत भूषण
  • जन्म – 1613
  • जन्म स्थान – कानपुर, उत्तर प्रदेश
  • पिता – रत्नाकर त्रिपाठी
  • भाई – दो भाई (चिंतामणि, मतिराम )
  • मृत्यु – 1707 (महाकवि भारत भूषण की जीवनी)

प्रारंभिक जीवन

शिवराज भूषण का जन्म 1613 को तीकवापुर गांव कानपुर, उत्तर प्रदेश में कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार में रत्नाकर त्रिपाठी के घर हुआ। भागीरथ प्रसाद दीक्षित इनका बचपन का नाम ‘मतिराम’ बताते हैं और विश्वनाथ प्रसाद इनका नाम ‘घनश्याम’ बताते हैं। इन्होंने अपने परिवार तथा जीवन की कोई और बातें किसी भी माध्यम से नहीं बताइ है अतः इनके परिवार की जानकारी एवं उनके नाम की जानकारी एक आधार है।

इनके दो भाई जिनका नाम चिंतामणि और मणिराम है। ये बचपन में काफी आलसी और निकम्मे थे एक बार नमक मांगने पर उनकी भाभी ने ताना मारते हुए कहा कि “नमक कमा कर लाए हो” इस ताने ने भूषण जी के दिल पर आघात किया और वह घर छोड़कर निकल गए साथ ही भाभी को अपने जवाब के रूप में ताना ही दिया उन्होंने कहा कि “अब जब कमाएंगे तब ही खाएंगे”। घर छोड़कर वे कई आश्रमों में गए और बाद में उन्हें शिवाजी महाराज के आश्रम में आश्रय मिला कहा जाता है कि “बाद में उन्होंने भाभी को ₹100000 तक का नमक भिजवाया”। (भारत भूषण का बचपन)

भूषण के आश्रयदाता

इन्होंने मुख्य रूप से शिवाजी तथा छत्रसाल के दरबार में आश्रय लिया और साथ ही इन्होंने

  • कुमायूं
  • श्रीनगर
  • जयपुर
  • जोधपुर
  • मोरग
  • रीवा

आदिलशाह आदि दरबार में आश्रय लिया यह सूचना इनके छंद के माध्यम से मिलती है। (भारत भूषण के आश्रयदाता)

भूषण जी की रचनाएं

महाकवि भारत भूषण ने कई प्रमुख ग्रंथ लिखे हैं जिनमें प्रमुख तीन रचनाएं वीर रस से युक्त है जो निम्न है -:

  • शिवा बावनी
  • शिवराज
  • भूषण छत्रसाल दशक

इन तीनों ग्रंथों में भूषण जी के छत्रशाल व शिवाजी की महानता, वीरता का वर्णन किया है। (कवि भारत भूषण की जीवनी) इनके अलावा और तीन ग्रंथों की रचना की है जो निम्न है -:

  • भूषण हजार
  • भूषण उल्लास
  • दुषनोल्लास

इनकी दृश्य रचनाएं काफी प्रसिद्ध है, युद्ध दृश्यों को बेहद अच्छे से चित्रित किया है।

भूषण की भाषा व काव्य शैली

ये रितिकाल के महान कवि होने के बावजूद रिती साहित्य से मुक्त हैं इनकी रचनाएं शुद्ध ब्रज ना होकर उबड़ खाबड़ है। जब सभी कवी इस काल में श्रृंगार रस में रचनाएं कर रहे थे तब कवी भूषण ने वीर रस से भरी कविताओं की रचना कर राष्ट्रीयता का सिंहनाद किया। उस वक्त ज्यादातर हिस्सों में मुस्लिम शासन था जिसके चलते हिंदू धर्म व गौरव नष्ट होता जा रहा था लेकिन भूषण जी ने हिंदुत्व की रक्षा करने के लिए कई कविताएं लिखी इस कारण इन्हें हम ‘राष्ट्रीय कवि’ भी मान सकते हैं। इन्होंने अपनी रचना ब्रज, तुर्की, अरबी, फारसी आदी भाषा में की है। (भारत भूषण बायोग्राफी इन हिंदी)

रचनाओं का संक्षिप्त परिचय

महाकवि भारत भूषण जी ने प्रमुख 6 ग्रंथों की रचना की है जिनमें से

  • भूषण हजार
  • भूषण उल्लास
  • दुषनोल्लासा

यह तीनों वर्तमान में उपलब्ध नहीं है। बाकी के तीनों ग्रंथ

  • शिवराज भूषण
  • शिवा बावनी
  • छत्रसाल दशक

ग्रंथों का संक्षिप्त परिचय नीचे दिया गया है।

शिवराज भूषण-: इस ग्रंथ की रचना उन्होंने 1673 में की। इसमें 105 अलंकार व कुल 305 पद हैं अतः यह इनका अलंकार लक्षण ग्रंथ है। इस ग्रंथ की रचना इन्होंने शिवाजी के आश्रय में रहकर की है। (महाकवि भारत भूषण की रचनाएं) इस वीर रस से भरे ग्रंथ के नायक शिवाजी तथा विद्रोह में औरंगजेब की नीतियों के विरुद्ध है ।

शिवा बावनी-: इसमें 52 कविताएं हैं जिसके अंतर्गत शिवाजी का पराक्रम तथा शौर्य का वर्णन है।

छत्रसाल दशक-: इसके अंतर्गत मात्र 10 कविताओ में बुंदेला वीर छत्रसाल के पराक्रम, शौर्य का वर्णन है ।

मृत्यु

रीतिकाल के महाकवि भारत भूषण अग्रवाल का 1705 ई. में देवलोक गमन हो गया। (भारत भूषण जी की मृत्यु)

प्रमुख तथ्य

✓• ये रीतीकाल के प्रमुख कवि है ।

✓• इनकी रचनाओं में रस – वीर रस तथा छंद – कवित्त तथा सवैया है।

✓• इन्होंने घर छोड़ने के बाद कई दरबार में आश्रय लिया लेकिन इन्हें मुख्य रूप से छत्राशाल और शिवाजी का आश्रय बेहद अच्छा लगा।

✓• हिंदी साहित्य में इन्हें “रीतिकाल का राष्ट्रकवि” कहा है। (कवि भारत भूषण मेंन पॉइंट)

✓• इन्होंने अपने काव्य में नायक के रूप में छत्रशाल व शिवाजी का चयन किया।

✓• इन्हें भूषण की उपाधि “चित्रकूट के राजा रुद्रशाह सोलंकी” ने दी है।

✓• ऐसी मान्यता है कि छत्रशाल ने इनकी पालकी को कंधा लगाया।

✓• इन्होंने एक ताने के जवाब में अपनी भाभी एक लाख रुपए तक का नमक भिजवाया। (रितीकाल के कवि भारत भूषण का जीवन परिचय)

✓• भूषण ने एक बेहद सुंदर कविता शिवाजी को 52 बार सुनाई जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने 52 हाथी, 52 गांव, तथा 52 लाख का दान देकर सम्मानित किया ।

✓• नगेंद्र ने इन्हे “रितिकाल का विलक्षण कवि” माना है।

FAQ

कवि भारत भूषण का जन्म कब हुआ?

महाकवि भारत भूषण का जन्म 1613 ई. को कानपुर के तिकवापुर गांव में हुआ।

इनके बचपन का नाम क्या था?

भागीरथ प्रशाद दीक्षित के अनुसार – मतिराम
विश्वनाथ प्रसाद के अनुसार – घनश्याम है।

भारत भूषण की जाती क्या है?

ये कान्यकुब्ज ब्राह्मण है।

भूषण की रचनाए प्रमुख रूप से कौनसे रस में रची गई है?

वीर रस में।

भारत भूषण के प्रमुख ग्रंथ कोन कोनसे है?

भूषण हजारा, भूषण उल्लास, दुषनोल्लासा (ये तीनों वर्तमान में उपलब्ध नहीं),शिवराज भूषण, शिवा बावनी, छत्रशाल दशक आदि।

महाकवि भारत भूषण की मृत्यु कब हुई?

इनकी मृत्यू 1705 ई. में हुई।

तो दोस्तों, आज हमने महाकवि भारत भूषण अग्रवाल के बारे मे विस्तार से जाना है इन्होंने रीतीकाल में होने के बावजूद वीर रस से भरे ग्रंथ लिखे और हिंदुत्व की रक्षा की। ये अपने काल के सबसे प्रमुख कवि है जिन्हें “राष्ट्रीय कवि” कहा गया है। तो दोस्तों आपको हिंदी साहित्य के महाकवि भारत भूषण के बारे में जानकर केसा लगा कमेंट कर जरूर बताएं और लेख को शेयर अवश्य करें।

Tushar Shrimali Jivani jano के लिए Content लिखते हैं। इन्हें इतिहास और लोगों की जीवनी (Biography) जानने का शौक हैं। इसलिए लोगों की जीवनी से जुड़ी जानकारी यहाँ शेयर करते हैं।

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