David Kinsley 10 Mahavidya PDF in Hindi | 10 महाविद्या पुस्तक पीडीऍफ़

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महाविद्या का शाब्दिक अर्थ महान बुद्धि से है। महाविद्या 10 हिन्दू देवी-देवताओ का समूह है। प्रकृति के कण-कण और ब्रह्माण्ड के हर एक कोने में यह 10 महाविद्या समाहित है। शास्त्रों में इन 10 महाविद्या को आदिशक्ति माता पार्वती का ही रूप माना जाता है। सामन्यतः 10 महाविद्या विभिन्न दिशाओ की शक्तियाँ है।

इस पोस्ट में हम आपको David Kinsley 10 Mahavidya PDF फॉर्मेट में उपलब्ध करवाने जा रहे है, साथ ही इन दस महाविद्या के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी प्रदान करने वाले है। यदि आप डेविड किंस्ले 10 महाविद्या के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते है, इस पोस्ट को शुरू से लेकर अंत तक जरूर ध्यानपूर्वक जरूर पढ़े।

David Kinsley 10 Mahavidya PDF in Hindi Details

PDF Title David Kinsley 10 Mahavidya PDF in Hindi
Language Hindi
Category Religion
PDF Size 9 MB
Total Pages 325
Download Link Available
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David Kinsley 10 Mahavidya PDF in Hindi

10 महाविद्या मुख्यतः दस दिशाओ में विभाजित है। जो सभी दिशाओं की शक्तियाँ मानी जाती है। भगवती काली और तारा देवी उत्तर दिशा की, श्री विद्या ईशान दिशा की, देवी भवनेश्वरी पश्चिम दिशा की, त्रिपुर भैरवी दक्षिण दिशा की, मात छिन्नमस्ता पूर्व दिशा की, धूमावती पूर्व दिशा की, माता बगलामुखी दक्षिण दिशा की, मातंगी वायव्य दिशा की तथा माता कमला नैत्य दिशा की अधिस्ठात्र है।

इन महाविद्या की साधना दो कुलों के रूप में की जाती है। जो मुख्यतः श्री कुल और काली कुल है। इन दोनों कुलो में नौ-नौ देवियो का वर्णन मिलता है। इस प्रकार यह कुल मिलकर 18 हो जाती है। उच्च ऋषियों ने इन्हे तीन रूपों में माना है। उग्र, सौम्य और सौम्य-उग्र।

उग्र में काली, छिन्नमस्ता, धूमावती और बगलामुखी शामिल है। वही सौम्य में त्रिपुर सुंदरी, भवनेश्वरी, मातंगी और महालक्ष्मी अर्थात देवी कमला है। तारा तथा भैरवी को उग्र तथा समय दोनों माना गया है।

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार यह सभी रूप देवी भगवती के ही है। ऐसा माना जाता है कि एक बार देवी गोरी भगवान शिव पर अत्यधिक क्रोधित थी। उनके अत्यधिक क्रोध से उनका शरीर धीरे-धीरे काला पड़ने लग गया। भगवान शिव ने उनके क्रोध को कम करने के लिए उनसे दूर जाने का निर्णय किया।

जब भगवान शिव देवी भगवती से दूर गए तो कुछ ही दुरी पर उन्हें देवी भगवती का दिव्य रूप दिखाई दिया। इसके बाद उन्हें देवी भगवती का एक-एक रूप दसों दिशाओ में दिखाई दिया, जो उन्हें चारो दिशाओ से घेरे हुए था। भगवान शिव ने इन दसों रूपों के रहस्य को जानने के लिए भगवती से पूछा तो देवी ने अपने सभी रूपों के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने कहा कि इन सभी रूपों की पूजा अर्चना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके बाद महादेव के निवेदन करने पर सभी देवियाँ माता काली के रूप में समाकर एक हो गयी।

The Ten Mahavidyas David Kinsley PDF | 10 महाविद्या

1. काली

दस महाविद्या में से काली प्रथम रूप है। माता का यह रुप साक्षात् और जागृत रूप है। काली के रूप में माता का किसी भी प्रकार से अपमान करना स्वयम को संकट में डालने के समान है। दैत्यों का वध करने के लिए माता ने इस रूप को धारण किया था। इनका रूप अत्यधिक भयावहि है।

माता का विशाल रूप कई भुजाये में फैला हुआ है। इनके एक हाथ में खडग, दूसरे हाथ में त्रिशूल और तीसरे हाथ में कटे हुए सिर तथा गले में मुंडी की माला पहने हुए विकराल रूप लिए हुए है।

2. तारा

माँ का दूसरा रूप है तारा। इनकी सर्वप्रथम महर्षि वशिष्ठ ने आरधना की थी। देवी तारा हिन्दू धर्म के साथ बोद्ध धर्म की भी देवी मानी जाती है। देवी अन्य स्वरूपों में अष्ट-तारा का निर्माण करती है।

3. त्रिपुर सुंदरी

चार भुजा और तीन नेत्र वाली षोडशी माहेश्वरी देवी का रूप है। जिन्हे ललिता, राज राजेस्वरी, त्रिपुर सुंदरी के नाम से भी जाना जाता है। “ऐ हिनम श्रीं त्रिपुर सुंदरीये नमः” नामका मन्त्र का जाप करके माता को प्रसन्न किया जा सकता है। संसार के विस्तार का समस्त कार्य इन्ही में समाहित है। इन्हे परा कहा गया है।

4. भवनेश्वरी

भवनेश्वरी को आदिशक्ति और मुल प्रकृति भी कहा गया है। भवनेश्वरी ही शताक्षी और शाकम्भरी नाम से प्रसिद्ध हुई। पुत्र धन की प्राप्ति के लिए लोग इनकी आरधना करते है। भक्तो को अभय और सिद्धिया प्रदान करना इनका स्वाभाविक गुण है। इस महाविद्या की आरधना करने से सुर के समान तेज ऊर्जा प्राप्त होने लगती है।

माता की आरधना करने से धन की प्राप्ति होती है। माँ भवनेश्वरी की साधना के लिए कालरात्रि, ग्रहण, होली, दीपावली, महाशिवरात्रि, कृष्णपक्ष की अष्टमी और चतुर्दशी शुभ समय माना जाता है।

5. छिन्नमस्ता

इनका सर कटा हुआ है तथा इनकी तीन आँखे है। देवी के गले में हड्डियों की माला तथा कंधे पर गोपवीत है। शांत रूप से इनकी उपासना करने से यह अपने शांत भाव को प्रकट करती है। यदि आप उग्र रूप में देवी की उपासना करते है तो आपको देवी उग्र रूप में दर्शन देती है।

देवी की उपासना करने से आप रोगमुक्त तथा शत्रुओ से मुक्त रहते है।

6. त्रिपुर भैरवी

त्रिपुर भैरवी की उपासना से सभी प्रकार की बंधनो से मुक्त हो जाते है। भैरवी के कई रूप बताये गए है – त्रिपुरा भैरवी, चैतन्य भैरवी, सिद्ध भैरवी, भुवनेश्वर भैरवी, सम्पदाप्रद भैरवी, कमलेश्वरी भैरवी, कौलेश्वर भैरवी, कामश्वरी भैरवी, नित्या भैरवी, रूद्रा भैरवी, षटकुटा भैरवी आदि।

त्रिपुर भैरवी साधक को युक्ति और मुक्ति दोनों ही प्रदान करती है। इसकी साधना से संतान प्राप्ति होती है। जो भी व्यक्ति देवी की आरधना करता है, उसका जल, थल और नभ में वर्चस्व कायम रहता है। व्यक्ति के आजीविका और व्यापार में इतनी वृद्धि होती है कि व्यक्ति संसार भर में धन श्रेष्ठ अर्थात सर्वाधिक धनी बनकर सुख का भोग करता है।

7. धूमावती

माँ धूमावती का कोई स्वामी नहीं होने के कारण इन्हे विधवा माता माना जाता है। इनकी साधना से आत्मबल का विकास होता है, जिससे जीवन में निरंतरता और निश्च्यंता का भाव आ जाता है। ऋग्वेद में इन्हे सुतरा के नाम से पुकारा गया है। धूमावती महाविद्या के लिए अतिआवश्यक है कि व्यक्ति सात्विकता और सत्यता और संयम का पालन करने वाला हो तथा लोग लालच से दूर, शराब और मांस तक को छुए नहीं।

धूमावती बहुत ही उग्र है। भगवान शिव से भोजन मांगने पर भोजन लाने में देरी होने से भगवान शिव को ही निगल लिया, जिसके बाद शिवजी धुंए की माया से उसके शरीर से बाहर आ गए और कहा कि तुमने तो अपने पति को ही निगल लिया, इसलिए आज से तुम विधवा हो तथा तुम बिना श्रृंगार से रहो और आज से तुम धूमावती के नाम से प्रसिद्ध होगी।

8. बगलामुखी

बगलामुखी की साधना युद्ध में विजय प्राप्त करने तथा शत्रुओ के नाश के लिए की जाती है। महाभारत काल में भगवान कृष्ण और अर्जुन ने माँ बगलामुखी की आरधना की थी। माँ बगलामुखी की उपासना से साधक का जीवन निष्कंटक तथा लोकप्रिय बन जाता है।

9. मातंगी

मतंग शिव का नाम है। गृहस्थ जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए इनकी पूजा की जाती है। चन्द्रमा को सर पर धारण किये हुए माँ मातंगी श्याम वर्ण की है। भगवती मातंगी मतंग ऋषि की कन्या के रूप में अवतरित हुई है। ऐसा माना जाता है कि रति, प्राप्ति, मनोभवा, क्रिया, अनंग मदना, मदनलसा, शुद्धा इनके अष्ट उर्जाओ के नाम है।

10. कमला

माता लक्ष्मी को कमला भी कहते है। श्री लक्ष्मी को सर्वलोक माहेश्वरी की उपाधि दी गयी है। भगवत में इन्हे भुवनेशवरी, इंद्रा ने इन्हे यागविद्या, महाविद्या तथा गुह्यविद्या कहा है। जीवन में दरिद्रता को दूर करने के लिए साधक द्वारा माँ कमला की पूजा अर्चना की जाती है।

जिस व्यक्ति पर माँ कमला की कृपा हो जाती है, तो वह व्यक्ति कुबेर के समान धनि बन जाता है।

यदि आप इन 10 महाविद्याओ के बारे में विस्तृत रुप से जानना चाहते है तो पोस्ट में दी गयी PDF Download कर सकते है। यहाँ से आप इन दस महाविद्याओ के बारे में विस्तार पूर्वक जान पाएंगे।

FAQs : David Kinsley 10 Mahavidya PDF in Hindi

David Kinsley 10 Mahavidya PDF in Hindi मुफ्त में कैसे Download करे?

यदि आप दस महाविद्याओ को PDF फॉर्मेट में डाउनलोड करना चाहते है तो पोस्ट में दिए गए डाउनलोड बटन पर क्लिक करके आसानी से फ्री में डाउनलोड कर सकते है।

महाविद्या कितने प्रकार की होती है?

कुल 10 महाविद्या है। जो इस प्रकार है – काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी व कमला।

महाविद्या का पाठ करने से क्या होता है?

इनकी साधना से जीवन में निडरता और निश्चंतता आती है। इनकी साधना या प्रार्थना से आत्मबल का विकास होता है। इस महाविद्या के फल से देवी धूमावती सूकरी के रूप में प्रत्यक्ष प्रकट होकर साधक के सभी रोग अरिष्ट और शत्रुओं का नाश कर देती है। प्रबल महाप्रतापी तथा सिद्ध पुरूष के रूप में उस साधक की ख्याति हो जाती है।

Conclusion :-

इस पोस्ट में David Kinsley 10 Mahavidya PDF in Hindi मुफ्त में उपलब्ध करवाई गयी है। साथ ही दस महाविद्या के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गयी है। उम्मीद करते है कि 10 Mahavidya Book Download करने में किसी भी प्रकार की समस्या नह हुई होगी।

आशा करते है कि यह पोस्ट आपके लिए मददगार साबित हुई होगी। यदि आपको 10 Mahavidya David Kinsley in Hindi PDF Download करने में किसी भी प्रकार की समस्या आ रही हो तो कँनेट करके जरूर बताये। साथ ही इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे।

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