Kabir Das Biography in Hindi~ कबीरदास जी का जीवन परिचय

कबीर दास जी जिनके नाम का अर्थ महान माना जाता है, हम आज एक महान संत कबीर दास जी के बारे में पढ़ने वाले हैं। इसके अंतर्गत कबीर दास जी का जीवन परिचय, महत्वपूर्ण रचनाएं, साहित्य में इनका स्थान यह सभी हम जानने वाले हैं। दोस्तों कबीरदास जी के बारे में तो बहुत सारे लोग जानते होंगे पर हम सरल शब्दों में संक्षिप्त में इनके बारे में बताने का प्रयास करते हैं। kabir das biography in hindi कबीर दास जी रहस्यवादी ज्ञानाश्रई शाखा के 15 वीं सदी के प्रमुख कवि थे।

निर्गुण शाखा में काव्य धारा के प्रवर्तक भी रहे, हिंदी भक्ति काव्य धारा के सुप्रसिद्ध कवि कबीर दास जी का जन्म 15 वीं सदी के 1455 ईस्वी में काशी में हुआ यह माना जाता है। इनकी रचनाओं ने हिंदी के क्षेत्र में बहुत प्रभाव डाला और अपने जीवन का सर्वाधिक समय समाज में स्थित कुरीतियां, जातिवाद को मिटाने पर बल दिया।

ये हिंदू व इस्लाम दोनों धर्म को मानते थे धर्मनिरपेक्ष पर बहुत बल दिया, कबीर दास जी के हिंदू या मुसलमान होने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है। समाज में फैली कुरीतियों जैसे धर्म में पक्षपात, जातिवाद, ऊंच-नीच, अंधविश्वास और समाज में व्याप्त सामाजिक बुराइयां सभी की आलोचना की गई थी इनके द्वारा।

तो अब हम पढ़ने वाले हैं कबीरदास जी का जीवन परिचय biography of kabir das ji in hindi इनकी जीवनी को आप पूरा पढ़े क्योंकि यह ज्ञान और परीक्षाओं की दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण होने वाला है तो चलिए हम इनकी जीवनी पर प्रकाश डालते है।

कबीरदास जी का जीवन परिचय (Kabir Das Ji Ka Jeevan Parichay in Hindi)

हालांकि कबीर दास जी के जन्म को लेकर कई विद्वानों में मतभेद रहे हैं फिर भी ऐसा माना जाता है कि इनका जन्म 15 वीं सदी ,संवत 1455 में काशी में हुआ इनके गुरु का नाम संत आचार्य रामानंद जी था। कबीर दास जी को एक ज्ञानवान गुरु की तलाश थी तब वे संत आचार्य रामानंद जी से मिले और तभी से ये रामानंद जी को अपना गुरु बनाना चाहते थे। परंतु रामानंद जी ने कबीर का गुरु बनने से इनकार कर दिया।

कबीर दास जी ने निश्चय कर लिया था कि हर हाल में इन्हें अपना गुरु तथा मैं इनका शिष्य बन कर रहूंगा रामानंद जी रोजाना गंगा स्नान करने जाते थे तब इनको विचार आया और ये सुबह 4 बजे जिस मार्ग से रामानंद जी स्नान करने जाते उसी मार्ग पर सीढ़ियों पर लेट गए सुबह 4 बजे जब रामानंद जी स्नान के लिए लौट रहे थे तो उनका पैर कबीर के शरीर पर पड़ा और तत्काल उनके मुख से राम-राम शब्द निकल पड़ा उसी समय से कबीर दास जी ने उनको अपना गुरु माना रामानंद जी ने भी कबीर को अपना शिष्य मानकर तभी से शिक्षा-दीक्षा देने लगे।

पालन पोषण- नीरू और नीमा:- इन्होंने कबीर दास जी को लहरतारा नामक तालाब पर पाया था कबीर दास जी एक विधवा ब्राह्मणी के पुत्र थे जिसे यह ब्राह्मणी लहरतारा तालाब के पास छोड़ आई तो यहीं से नीरू और नीमा को यह बच्चा मिला जिसे यह घर पर ले गए और उनका लालन-पालन किया और उनका नाम कबीर दास रखा। कबीर दास की दो शिष्य थे जिनका नाम लोही और कमाली था।

इन्हें कबीर पंथ मे विरानी व बाल ब्रह्मचारी बताया गया परंतु ऐसा माना जाता है कि कबीर दास जी की पत्नी एवं संतान दोनों थे। कबीरदास के सारे ग्रंथ उनके द्वारा नहीं लिखे गए वे बोलते व उनके शिष्य लिखते थे। ऐसा माना जाता है कि कबीर दास जी अनपढ़ थे यह बात भी इनके द्वारा दिए गए कथन से स्पष्ट होती है।

“मसि कागज छूयो नहीं ,कलम गई नहीं हाथ”
कबीर दास जी समाज सुधारक कवि रहे।

कबीरदास जी की रचनाएँ

रचनाएं:- कबीर दास जी की रचनाएं कृतियां और उनकी वाणी का संग्रह बीजक के नाम से प्रसिद्ध है इनकी प्रमुख तीन रचनाएं देखने को मिलती है बीजक के अंतर्गत आप देख सकते है।

बीजक (साखी सबद रमैनी) यह कई भाषाओं जैसे ब्रज, अवधि, पूरबी, खड़ी बोली, राजस्थानी और पंजाबी सभी भाषाओं का संग्रह थी।

साखी:- अधिकांश साखियां दोहे में लिखी गई और इनमें सोर्टो का भी प्रयोग किया गया कबीर के सिद्धांत साखी के द्वारा ही बताएं गए थे।

सबद- इसमें कबीर दास जी के मुख्य उद्देश्य, भाव बताएं गए। यह पूरी तरह संगीतात्मक रूप में लिखी गई इसमें कबीर के प्रेम साधना की अभिव्यक्ति मिलती है।

रमैनी:- ये चौपाइयां वह छंद में लिखी गई है इसके अंतर्गत कबीर के रहस्यवादी व दार्शनिक विचारों को प्रकट किया गया। Kabir Das Biography in Hindi.

कबीरदास जी के जीवन के महत्वपूर्ण बिंदु

कबीर दास जी शांतिपूर्ण वातावरण में रहने वाले व्यक्ति थे एवं अहिंसा के मार्ग पर चलते, हमेशा सत्य बोलते व समाज में उपस्थित गंदगी से दूर रहते तथा उसे समाज व लोगों के अंदर से समाप्त करना इनका मकसद बन गया था इन्होंने जातिवाद ऊंच-नीच भेदभाव सभी का विरोध किया, ऐसे सरल स्वभाव के कारण लोग इनका आज भी आदर करते व पूजते हैं।

Kabir das short story in hindi कबीर दास जी काशी में रहते थे तो उस समय यह माना जाता था कि जिस किसी का निधन काशी होता है वह स्वर्ग में जाता है और जिसका निधन मगहर में होता वह नरक में जाता है अंतिम दिनों मे उन्होंने विभिन्न भागों में यात्राएं की और मगहर में ही अपनी अंतिम सांस ली आज भी वहां पर इनकी मजार और समाधि स्थित है कबीर दास जी का मानना था कि काशी में मरने से स्वर्ग नहीं मिलता जबकि राम की भक्ति में मुक्ति पाने से ही स्वर्ग मिलता है। 10 lines about kabir das in hindi

“अबकहु राम कवन गति मोरी
तजीरे बनारस मति भई मोरी”

कबीरदास जी की साखियाँ Kabir Das Short Essay in Hindi

हरि “हरिमोर पिउ, मैं राम की बहुरिया
हरि जननी ,मैं बालक तोरा”

इसके अनुसार कबीर दास जी परमात्मा को अपने माता-पिता, मित्र सभी रूप में देखते हैं यह सभी मनुष्य के सर्वाधिक निकट रहते हैं इसलिए कबीरदास जी कहते हैं कि इन सभी में ही आप परमात्मा को देख सकते हैं।

“बनते भागा बीहरे पड़ा,करहा आपनी बान”
“करहा बेदन कासो कहे , को करहा को जान”

कबीर दास जी के इस साखी का गहरा असर भगवान गोस्वामी जी पर पड़ा। काशी से यात्रा वृतांत के समय कबीर दास जी पिथौरा बाद शहर में गए थे जो कालिंजर जिले में था वहा रामकृष्ण का छोटा सा मंदिर स्थित है वहीं इनकी मुलाकात भगवान गोस्वामी जी से हुई थी और तब कबीर दास जी ने यह साखी बोली थी जिसे भगवान गोस्वामी दास काफी प्रसन्न हुए थे। Kabir Das Biography in Hindi.

कबीरदास जी का निर्गुणी जीवन Kabir Das Biography in Hindi

कबीर दास जी निर्गुण भक्ति के कवि थे यह मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करते हैं उनके अनुसार प्रभु को आप कहीं भी देख सकते हैं वे प्रत्येक कण में विद्यमान है। जब राम को अपने मित्र अपने माता-पिता सभी में देख पा रहे हैं तो आप मूर्ति पूजा क्यों करते हो।

कबीर दास जी को कदापि मंजूर नहीं था कि राम किसी फ्रेम ढांचे में बैठ जाएं वो राम की रूपाकृति की भी कल्पना नहीं करते हैं। उनके अनुसार बस विश्वास होना चाहिए कि राम है, ईश्वर को कभी भी उनके रूप से, काल से उनके नाम से तथा उनके गुण से सीमाओं में बांधा नहीं जा सकता।

कबीरदास जी का साहित्य में स्थान

कबीर दास जी बहुमुखी प्रतिभा लेकर अवतरित हुए थे अकड़ व्यक्ति थोड़े लापरवाह और मस्त मौलाना फकीर थे मुसलमान होते हुए भी मुसलमान नहीं और जन्म से हिंदू होते हुए भी विरक्त और विरक्त होते हुए गृहस्थ थे। कबीर दास जी ने बाहरी आडंबर करने वाले को फटकारा है। धर्मनिरपेक्ष के साथ चलते हुए हिंदू और मुसलमान को एक समान बताया और एक साथ रहने का पाठ पढ़ाया।

ये एक समाज सुधार कवि रहे। इनकी सरल स्वभाव व्यक्तित्व और विचारों से प्रभावित होकर इनके सैकड़ों अनुयाई बन गए। इनके नाम के कबीर मठ, कबीर पंथ स्थापित हो गये। आज केवल बनारस या काशी में ही नहीं बल्कि सर्वत्र जगह इनको पूजा जाता है।

कबीरदास जी की साखियाँ

“ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोई।अपना तन शीतल करें ,औरन के सुख होई”।।

“सुखिया सब संसार है, खाए अरुण सोवे। दुनिया दास कबीर है ,जागे अरु रोवे”।।

“जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं। सब आंधियारा मीटी गया, जब दीपक देखिया माँहि”।।

“हर घर जाल्या आपणाँ, लिया मुराङा हाथी। अब घर चलो तास ,का जे चले हमारे साथी”।।

कबीरदास जी के दोहे

अब यहाँ हम कबीरदास जी के दोहे बताने वाले हैं जो उनकी अनेक रचनाओं में से एक हैं। वैसे तो कबीर दास जी के कही दोहे हैं लेकिन यहाँ हम कुछ बहुत ही लोकप्रिय दोहो को उनके हिंदी रूपांतरण के साथ समझेंगे।

गुरु गोविन्द दोउ खड़े, काके लागूं पायँ।

बलिहारी गुरु आपके, गोविन्द दियो बताय ।।

कबीर दास जी के सबसे लोकप्रिय दोहो में से एक यह हैं। इसमें कबीर दास जी कहना चाहते हैं की यदि हमारे सामने गुरु और भगवान दोनों खड़े हैं तो हम किसके चरण स्पर्श करेंगे? गुरु ने अपने ज्ञान से ही भगवान से मिलने का रास्ता बताया हैं, इसलिए गुरु के चरण स्पर्श स्पर्श करने चाहिए। कबीरदास जी ने इस दोहे के माध्यम से गुरु को भगवान से भी बढ़कर बताया हैं।

यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।

शीश दियो जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान ।।

इस दोहे में माध्यम से कबीरदास जी कहना चाहते हैं की हमारा जो शरीर हैं वो विष यानि जहर से भरा हुआ हैं, और गुरु को अमृत की खान बताया हैं। अगर शीश देने पर भी कोई सच्चा गुरु मिल जाये तो भी इसे एक सस्ता सौदा समझना चाहिए। कबीर दास जी की नजर में जीवन में एक सच्चा गुरु होना बहुत ही आवश्यक हैं। Kabir Das Biography in Hindi.

कबीर सुता क्या करें, जगी न जपे मुरारी।

एक दिन तू भी सोवेगा, लम्बे पाँव पसारी ।।

इस दोहे के माध्यम से कबीर दास जी कहना चाहते हैं की मनुष्य हमेशा क्यों सोया रहता हैं, मनुष्य को जग कर भगवान की भक्ति करनी चाहिए। नहीं तो एक दिन तू भी लम्बे पाँव पसार कर हमेशा के लिए सो जायेगा। मतलब कबीर दास जी मनुष्यों को ईश्वर की भक्ति करने के लिए कहते हैं। उनका मानना हैं सोना तो एक दिन सबको हैं ही।

दुःख में सुमिरन सब करे, सुःख में करे न कोय।

जो सुःख में सुमिरन करे दुःख कहे को होय ।।

इस दोहे के माध्यम से कबीरदास जी कहना चाहते हैं की दुःख में तो भगवान को सब याद करते हैं, लेकिन सुख के समय कोई याद नहीं करता। यदि मनुष्य सुःख के समय में भी ईश्वर को याद करेगा तो उसके जीवन में दुःख कभी आएगा ही नहीं।

बुरा जो देखन में चला. बुरा न मिला कोय।

जो मन देखा अपना, मुझसे बुरा न कोय ।।

इस दोहे के माध्यम से कबीरदास जी कहना चाहते हैं की मैं अपना पूरा जीवन दुसरो की बुराइयाँ देखने में लगा रहा, लेकिन जब खुद अपने अंदर झाँक कर देखा तो मुझसे बुरा कोई नहीं हैं। इसका मतलब हैं की इंसान को दुसरो की बुराइयाँ नहीं करनी चाहिए जबकि पहले खुद के अंदर झाँक कर देखना चाहिए। Kabir Das के दोहे इन हिंदी

ये थी कबीरदास जी की पूरी जीवनी कबीर दास जी का निधन death of kabir das in hindi 1575, 119 वर्ष की उम्र में मगहर में कबीर दास जी अमर हो गए। इनके जितना सरल स्वभाव ,देश के हित के काम, प्रतिभाशाली व्यक्तित्व और किसी कवि का नहीं हो पाया है।

इसलिए हमेशा ही अपने जीवन में दुसरो के प्रति प्रेम, भाव और आदर रखना चाहिए और अपने ईश्वर को याद करते रहना चाहिए। यदि आपको Kabir Das Biography in Hindi अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर कर दें।

Tushar Shrimali Jivani jano के लिए Content लिखते हैं। इन्हें इतिहास और लोगों की जीवनी (Biography) जानने का शौक हैं। इसलिए लोगों की जीवनी से जुड़ी जानकारी यहाँ शेयर करते हैं।

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