Major Dhyan Chand Biography in Hindi~ मेज़र ध्यान चंद का जीवन परिचय।

ध्यानचंद जी का सामान्य परिचय (Major Dhyan Chand information in Hindi):- आज हम बात करने वाले हैं हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के बारे में इनका नाम तो आप सभी ने सुना ही होगा जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद के संगम नगरी में हुआ था। ये हॉकी के भूतपूर्व खिलाड़ी और कप्तान हैं। विश्व लेवल पर इनकी गिनती हॉकी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में होती है।

भारत में हॉकी को एक सर्वोच्च स्थान दिलाने वाले खिलाड़ी के रूप में जाने जाते हैं। पहले ही मैच में तीन गोल, ओलंपिक में 35 गोल, और इंटरनेशनल में 400 गोल, ऑल ओवर 1000+ गोल के बेहतरीन बादशाह है। भारतीय टीम को तीन बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीताने वाले खिलाड़ी और सबसे बड़ी बात राष्ट्रीय खेल दिवस इनके जन्म तिथि के दिन मनाया जाता है।

हॉकी स्टिक के साथ इनका बहुत ही लगाव रहा है गेंद इस तरह इनकी हॉकी स्टिक से चिपकी रहती है जैसे चुंबक लोहे से चिपकी रहती है यह उनकी कलाकारी थी। इनके सामने वाले खिलाडियों को अक्सर इनके ऊपर शक रहता था कि ये cheating करते हैं या स्पेशल स्टिक का प्रयोग करते हैं। होलेंड में खेलते समय इनके हॉकी स्टिक में चुंबक होने के शक से इनकी स्टिक को तोड़कर देखा गया था।

अपने खेल के दम पर जर्मनी के हिटलर तानाशा और महान क्रिकेटर ब्रैडमैन तक को अपने खेल का दीवाना बना दिया था। उन्होंने अप्रैल 1949 में संन्यास लिया। 3 दिसंबर 1979 मेजर ध्यानचंद का स्वर्गवास हो गया था। तो चलिए हम आज खेल के अंतर्गत हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद short essay on Major Dhyan Chand in hindi के बारे में जानने का प्रयास करते हैं।

मेजर ध्यान चंद जी का परिवार (Major Dhyan Chand Biography in Hindi)

इसके अंतर्गत हम बात करने वाले हैं मेजर ध्यानचंद का जन्म कब हुआ था, मेजर ध्यान चंद की जाती क्या थी और इनके फैमिली मेंबर के बारे में क्योंकि लोग इसके बारे में इंटरनेट पर ज्यादा सर्च करते हैं लेकिन उन्हें सही जानकारी नहीं मिल पाती हैं।

  • मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को UP के इलाहाबाद मैं हुआ था। और
  • इसी दिन इनके जन्म तिथि के दिन को हम राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाते हैं।
  • इनकी हाइट 5 fit 7 inch थी।
  • पिता :- रामेश्वर सिंह ये सेना में सिपाही थे ।
  • माता :- शारदा सिंह
  • छोटा भाई :- रूप सिंह ये भी भारत की ओर से हॉकी खेलते थे।
  • पत्नी :-जानकी देवी 1936 में इनका विवाह हुआ था।
  • बच्चे :- बृजमोहन, सोहन सिंह, राजकुमार और अशोक कुमार
  • मेजर ध्यानचंद राजपूत परिवार से थे। इनका वास्तविक नाम ध्यान सिंह था परंतु इनके उपनाम हॉकी का जादूगर, चंद और विश्व के सबसे बड़े हॉकी खिलाड़ी के नाम से लोकप्रिय हो गया इसलिए इनका नाम ध्यानचंद हो गया।
  • न्यूजीलैंड दौरे से अंतरराष्ट्रीय शुरुआत की थी अप्रैल 1926 में। संरक्षक और प्रथम कोच- मेजर भोले तिवारी
  • टीम कोच :- पंकज गुप्ता
  • स्टेट टीम का नाम :- झांसी हीरो

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

हम बात कर रहे हैं मेजर ध्यानचंद के बचपन की इनका मूल नाम ध्यान सिंह था यह राजपूत परिवार के थे जन्म 29 अगस्त 1905 यूपी इलाहाबाद में हुआ था। बचपन में ध्यानचंद को हॉकी खेल में कोई खास रुचि नहीं थी। इनके पिता जी सेना में थे। बार-बार इनके पिताजी का स्थानांतरण हो रहा था जिसकी वजह से अपनी पढ़ाई पूर्ण ना कर पाए थे पास के विद्यालय से अपनी प्रारंभिक पढ़ाई कर रहे थे ये अपने पिता के साथ रहते थे इसलिए इनकी स्कूल लाइफ छठी कक्षा तक रही थी।

बचपन में अपने मित्रों के साथ पेड़ों की डालियों पर खेलना दौड़ना तथा कपड़ों की गेंद बनाकर मारना उनसे खेलने ऐसे खेल खेलते थे।जब ये 14 वर्ष की उम्र में थे तब अपने पिता के साथ हॉकी का मैच देखने गए थे जब वहां एक टीम को हारते देखा तो यह दुखी होकर अपने पिताजी से बोले कि मे अगर इस टीम से खेलता हूं तो परिणाम कुछ अलग होगा वहां खड़े एक ऑफिसर ने इनकी बात सुनी और इनको खेलने के लिए कहा और तब इनके जाने के बाद मैदान में माहौल अलग सा हो गया, इन्होंने 4 गोल लगातार कर दिए और चारों ओर स्टेडियम में तालियां बजने लगे थी। और यही से इनके करियर की शुरुआत हुई।

मेजर ध्यानचंद का करियर (Major Dhyan Chand Biography in Hindi)

इनके द्वारा ये मैच खेला गया जिसके बाद इनकी काफी तारीफ हुई और सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए थे। इसके बाद 1922 में मात्र 16 वर्ष की उम्र में इनको सेना में भर्ती कर लिया गया था। और इनके साथ के मेजर तिवारी ने इन्हें हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया। और धीरे-धीरे हॉकी का जुनून सा हो गया। अब ये हॉकी से दूर नहीं रह पाए।

मेजर भोले तिवारी जिन्हें हम ध्यान चंद जी के संरक्षक के साथ पहला कोच भी कर सकते हैं क्योंकि सेना में कार्य के दौरान ध्यानचंद को समय नहीं मिलता था ध्यानचंद अपनी ड्यूटी के बाद चांदनी रातों में मेजर तिवारी के साथ हॉकी का अभ्यास किया करते थे। तो दोस्तों अब तक उनका नाम ध्यान सिंह था परंतु चांदनी रातों में अभ्यास करते देखा उनके साथी सिपाहियों ने इनके नाम के बीच चंद्र लगा दिया था।

जो कुछ समय बाद चंद बन गया और धीरे-धीरे इनका नाम ध्यान चंद पड़ गया। अपने जुनून अभ्यास के दौरान अपने आप को हॉकी का सबसे बड़ा खिलाड़ी बना दिया और सेना की तरफ से खेलते हुए अपना सौ परसेंट देते रहें जिससे इनके प्रमोशन भी होता रहा और एक सिपाही से मेजर का सफर तय किया था। आर्मी के साथ हॉकी में भी अपना करियर बना चुके थे। 21 वर्ष की उम्र में इन्हें अंतरराष्ट्रीय मैचों में उतारा गया और न्यूजीलैंड दौरे पर जा रही टीम में इनको चुना गया था।

ओलंपिक खेल और उपलब्धियाँ

1926 :- अंतरराष्ट्रीय मैच मैं डेब्यू किया। इन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना डेब्यू मैच खेला था। इस दौरे में भारत ने 21 में से 18 मैच अपनी झोली में डाले थे।

1927 :- London Folk Stocke Festival मे ब्रिटिश हॉकी टीम के खिलाफ 10 मैचों में 72 में से 36 गोल किए।

1928 :- Olympic Match मात्र 23 की उम्र में 1928 में हो रहे नीदरलैंड समर ओलंपिक में भारतीय टीम में पहली बार चुना गया था।

17 मई 1928 :- ऑस्ट्रलिया को 6-0 से हराया।

18 मई बेल्जियम को हराया 9-0 से और 20 को मैच डेनमार्क के साथ हुआ डेनमार्क को भी 5-0 से हराया और 22 मई को स्विजरलैंड को 6-0 से हराकर टीम फाइनल में पहुंची । फाइनल मैच होलेंड के साथ हुआ था यहां खेलते हुए 3 में से 2 गोल ध्यानचंद ने किए थे भारत ने यह मैच 3-0 से जीतकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। 29 मई के दिन इन्हें पदक मिले।

Major dhyan chand biography in hindi :- 1932 Los Angeles Summer Olympic अब तो ध्यानचंद को टीम में शामिल करना वाजिब था। अब यह सेंटर के बेहतरीन खिलाड़ी बन चुके थे एक तरफ सेना में भी प्रमोशन मिल रहा था और हॉकी मैं तो जादूगर के रूप में जाने जा रहे थे इस समर ओलंपिक के दौरान सारे मैच में कुल 262 में से कुल 101 गोल इन्होंने खुद ने हीं किए थे। और यहा निर्णायक मैच भारत vs अमेरिका का रहा था। यहां तो हद ही हो गई भारत ने अमेरिकी टीम को 24-1 से धूल चटा कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया और इसी प्रकार Dhyan chand ko achievements मिलती रही।

1936 बर्लिन ओलंपिक Major Dhyan Chand Biography in Hindi बर्लिन ओलंपिक में ही ध्यानचंद को टीम का कप्तान बना दिया गया था इन्हें स्वयं विश्वास नहीं हुआ था फिर भी अपनी टीम व देश के लिए अपना 100% दिया। जर्मनी के साथ अभ्यास मैच17 जुलाई को हुआ इसमें भारत 4-1 से हार गई थी जिसे ध्यानचंद बहुत दुखी हुए थे और पूरी भारतीय टीम के खिलाड़ियों ने खाना तक नहीं खाया और इन्हें रात को नींद भी नहीं आई। Major Dhyan Chand Biography in Hindi

अभ्यास मैच के बाद ओलंपिक का पहला मुकाबला 5 अगस्त के दिन हुआ था यह मुकाबला भारत vs हंगरी के बीच हुआ था। जिसमें भारत विजय रही और 4-0से मैच जीता। दूसरा महा मुकाबला 7 अगस्त को भारत vs जापान इसमें भी भारत विजय रही और 9-0 से जापान को हराया। 12 अगस्त, भारत vs फ्रांस का मुकाबला था इसमें भी भारत विजय रही और फ्रांस को 10 गोल से हराया और भारत फाइनल में पहुंच गई।

15 अगस्त 1936– यहां हम बात करने वाले सबसे बड़े मैच ओलंपिक के फाइनल की इसमें dhyan chand achievements और ध्यानचंद को क्यों हॉकी का जादूगर कहते हैं वह आपको पता चल जाएगा। 15 अगस्त 1936 को ओलंपिक फाइनल भारत vs जर्मनी । ये मैच जर्मनी में खेला जा रहा था और स्टेडियम पूरा भरा हुआ था। मशहूर तानाशाह हिटलर भी वहीं मौजूद था अपनी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए।

मैच पहले हाफ तक बराबर रहा लेकिन भारत 1-0 से आगे था। मैच 14 अगस्त को होने की थी पर 14 अगस्त को बारिश भी आई थी और दूसरे दिन जर्मनी के विशेषज्ञों ने अत्यधिक पानी स्टेडियम में डलवा दिया था ताकि भारत के खिलाड़ी जो अपने सस्ते जूतों के साथ वहां खेल नहीं पाए तथा गोल नहीं कर पाए परंतु मेजर ध्यानचंद ने मैदान देखते ही अपने जूते उतार दिए और वह आसानी से दौड़ पाएं इसलिए बिना जूते पहने खेले थे। Major Dhyan Chand Biography in Hindi

और फिर क्या होना था अपनी टीम के साथ अगले half तक 7और गोल कर दिए। तानाशाह हिटलर अपनी टीम की शर्मनाक हार देखकर मैदान छोड़कर बीच में ही चले गए और भारत ने ये मैच 8-1 जर्मनी को हराया था। अगले दिन ध्यानचंद के अद्भुत खेल को देखते हुए तानाशाह हिटलर ने उन्हें अपने ऑफिस में बुलाया

उस समय ध्यान चंद जी के जूते फटे हुए थे तो उन्होंने जूतो की ओर इशारा करते हुए ध्यानचंद जी को पैसे का लालच दिया और अपनी टीम से खेलने के लिए कहा कि आप जर्मनी की तरफ से खेलो परंतु ध्यानचंद एक सच्चा देशभक्त था और वे अपना सारा जीवन भारतीय टीम से ही खेलना चाहते थे और हिटलर को तभी मना करके लौट गए। तो आप लोग भी जान गए होंगे कि ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर क्यों कहते हैं।

1948 रिटायर्ड- 42 वर्ष तक अंतरराष्ट्रीय मैचों व सेना में अपना योगदान दिया 1948 को 43 वर्ष की आयु में वह रिटायर हो गए थे रिटायर होने के बाद भी आर्मी में होने वाले मैचों में अपना योगदान देते रहे। Dhyanchand achievements, मेजर ध्यानचंद को 1956 में भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। ध्यानचंद को हॉकी का महानायक कहां जाता है खेल की दुनिया में अपनी ऐसी छाप छोड़ी जो अब और किसी के लिए संभव नहीं है उनके जन्म दिवस के दिन 29 अगस्त को हम राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाते हैं।

और हम यह कह सकते हैं कि हमारे राष्ट्र के लिए खेल रत्न पुरस्कार, भारत के मुख्य पुरस्कार सम्मान, द्रोणाचार्य ,अर्जुन पुरस्कार ये सभी आप ही की देन है। भारत को तीन बार स्वर्ण पदक दिलाने वाले मेजर ध्यानचंद को पद्म भूषण तो दिया गया लेकिन भारत रत्न के लिए इनके नाम को तीन बार अनदेखा कर दिया गया था खेल जगत में सभी चाहते थे कि इनको भारत रत्न सर्वोच्च सम्मान मिले लेकिन इन्हें अनदेखा कर दिया जाता था।

2014 में भारत रत्न सचिन तेंदुलकर को दिया गया। लेकिन ध्यानचंद जी को अभी तक सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित नहीं किया गया। Sports Club विनिया मे इनकी मूर्ति बनी हुई है जिसमें इनके चार हाथ दिखाए गए हैं और चारों हाथों में यह हॉकी स्टिक पकड़े हुए हैं इनके नाम से एक स्टेडियम का नाम भी रखा गया था दिल्ली में।

आखिरी दिन- जीवन के अंतिम दिन बिल्कुल भी अच्छे नहीं रहे क्योंकि इनको लीवर का कैंसर था परंतु हॉकी को एक सर्वोच्च सम्मान ,सर्वोच्च स्थान दिलाने वाले खिलाड़ी को उस समय देश भूल गया था।

लीवर के कैंसर का इलाज चल रहा था परंतु पैसों की कमी की वजह से इनका इलाज सही से नहीं हो पाया और वे दिल्ली के AIMS अस्पताल के जनरल वार्ड में 3 दिसंबर 1979 को इस दुनिया को अलविदा कह गए थे।
आज भी हॉकी के खिलाड़ी तथा हॉकी प्रेमी इन्हें भगवान की तरफ पूछते हैं आज हमने जाना Major Dhyan Chand Biography in Hindi, अपना बहुमूल्य समय देकर इस निबंध को पढ़ने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद और आपको मेजर ध्यान चंद जी की जीवनी कैसी लगी कमेंट करके हमें जरूर बताएं जय हिंद जय भारत।

Tushar Shrimali Jivani jano के लिए Content लिखते हैं। इन्हें इतिहास और लोगों की जीवनी (Biography) जानने का शौक हैं। इसलिए लोगों की जीवनी से जुड़ी जानकारी यहाँ शेयर करते हैं।

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