मीराबाई चानू का जीवन परिचय। Meera Bai Chanu Biography In Hindi

नमस्कार, दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं भारतीय खिलाड़ी मीराबाई चानू की जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम में पहला स्वर्ण पदक वेटलिफ्टिंग में भारत को दिलवाया है और अपना रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने अपनी छोटी उम्र से ही वेटलिफ्टिंग में जीत हासिल करना शुरू कर दिया और अब तक वे कई रिकॉर्ड तोड़ चुकी है,

भारत को ओलंपिक खेलों में वेटलिफ्टिंग में पूरे 21 सालों बाद मेडल प्राप्त हुआ है और यह रिकॉर्ड तोड़ने वाली मीराबाई चानू एक छोटे से गांव की है। उन्होंने कई अभाव और प्रयासों से यह रिकॉर्ड बनाया है तो चलिए जानते हैं इनकी पूरी कहानी को।

साइखोम मीरा बाई चानू का जीवन परिचय (सामान्य)

  • नाम – मीराबाई चानू
  • पूरा नाम – साइखोम मीराबाई चानू
  • जन्म – 8 अगस्त 1994
  • जन्म स्थान – मणिपुर
  • पिता – साइखोम कृति मीतेई
  • माता – साइखोम ओंगबी टोंबी लीमा
  • भाई – साइखोम सनातोंबा
  • बहन – साइखोम रंगीता, साइखोम शाया

प्रारंभिक जीवन तथा शिक्षा

मीराबाई का पूरा नाम साइखोम मीराबाई चानू है इनका जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर के छोटे से गांव में हुआ। इनके पिता का नाम साइखोम कृति मितेई तथा माता का नाम साइखोम ओंगबि टांबी लीमा है, इनके परिवार में इनके माता-पिता के अलावा एक भाई व दो बहने भी हैं जिनके नाम साइखोम सनातोबा (भाई), साइखोम रंगीता (बहन), साइखोम शाया (बहन) है। इनके पिता पी.डब्ल्यू.डी. डिपार्टमेंट में काम करते हैं व माता एक दुकान चलाने के साथ ही घर भी संभालती है, यह एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। (मीराबाई चानू का परिवार)

इनकी शिक्षा की बात करें तो कहीं पर बताया जाता है कि इन्होंने दसवीं तक की शिक्षा प्राप्त की है और कहीं पर इनके स्नातक पास करने की बात बताई जाती है, इनकी शिक्षा को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट बात सामने नहीं आई है। इन्होंने बचपन में कुंजरानी देवी के बारे में बहुत सुना और उन्हीं की तरह ये भी वेटलिफ्टर बनना चाहती थी, इन्होंने वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग कुंजरानी देवी से ली। कुंजारानी देवी भारतीय वेटलिफ्टर खिलाड़ी रह चुकी है एवं यह भी मणिपुर से ही है।

वेटलिफ्टिंग में करियर की शुरूआत

इन्होंने जब पहली बार कुंजरानी देवी को देखा उसी वक्त सोच लिया कि “मुझे भी इसी खेल में अपना करियर बनाना है”, उन्होंने कुंजारानी देवी को अपना आदर्श बना उन्हीं से ट्रेनिंग भी ली। इन्होंने वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग लेना शुरू किया ट्रेनिंग सेंटर इनके घर से 50 किलोमीटर की दूरी पर था तो ये रोजाना 50 किलोमीटर दूर ट्रेनिंग सेंटर जाती और वहां लगातार दो घंटे व्यायाम करने के बाद वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग लेती। मीराबाई चानू की जीवनी

ट्रेनिंग के बाद जब शाम को घर आती तो बेहद ज्यादा थकी और भूखी होती परंतु मध्यम वर्गीय परिवार में उन्हें ज्यादा खाने को नहीं मिलता रोज की तरह सादा खाना खाती और अपने आपको बिना थके बिना रुके लगातार आगे बढाती रही (मीराबाई चानू के करियर की शुरुआत)। वेटलिफ्टिंग में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने मात्र 11 वर्ष की उम्र में ही स्वर्ण पदक जीतकर की। वेटलिफ्टिंग के लोकल टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक अपने नाम कर मात्र 11 वर्ष में ही अपना नाम इस खेल से जोड़ पहली सीढ़ी चढ़ ली।

हार से स्वर्ण पदक का सफर

मीरा ने 2016 में रियो ओलंपिक में भाग लिया परंतु वहां उनके हाथ एकाएक रुक गए और वे भार नहीं उठा पाई, इस भार को वे अपने अभ्यास के दौरान कई बार उठा चुकी थी परंतु उस दिन वे हार गई और उनके नाम के साथ “डिड नॉट फिनिश” का टेग जोड़ दिया गया। इस हार से वे डिप्रेशन में चली गई उनका मनोबल पूर्ण रूप से टूट चुका था और इस डिप्रेशन से बाहर आने में उन्हें साइकेट्रिस्ट की सहायता लेनी पड़ी।

‘इस हार से मीरा इतनी टूट गई कि उन्होंने वेटलिफ्टिंग छोड़ने की सोच ली’ परंतु स्वयं को साबित करने के लिए उन्होंने हार नहीं मानी और अपना अभ्यास जारी रखा। (ओलंपिक वेटलिफ्टर मीराबाई चानू का जीवन परिचय) इस हार के अगले ही वर्ष 2017 में वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 194 किलोग्राम भार उठा स्वर्ण पदक अपने नाम कर शानदार वापसी की। यह स्वर्ण पदक उन्होंने मात्र 22 वर्ष की उम्र में प्राप्त कर नया रिकॉर्ड कायम किया,

ऐसा काम इतनी कम उम्र में करने वाली प्रथम भारतीय एथेलीट बनी। मीरा जब यह रिकॉर्ड कायम करने में लगी थी तभी उनकी बहन का विवाह भी था तो उन्होंने विवाह में जाने की बजाय अपने करियर की ओर ध्यान दिया और स्वर्ण पदक प्राप्त कर सभी की सराहना व प्रशंसा प्राप्त की। स्वर्ण पदक प्राप्त करने के बाद भी पिछली हार को नहीं भूल पाई और अगली बार के लिए पुनः तैयार हो गई। (मीराबाई चानू बायोग्राफी इन हिंदी)

सबसे ज्यादा वजन उठा तोड़ा खुद का रिकॉर्ड

अपनी पिछली हार को भुलाने और नए रिकॉर्ड बनाने उन्होंने 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में कदम रखा और स्वर्ण पदक प्राप्त किया इस दौरान उनकी पीठ में जबर्दस्त दर्द हुआ जिसका इलाज करवाने भारत सरकार द्वारा उन्हें अमेरिका भेजा गया और इस सहयोग से वे पुनः वजन उठाने के काबिल हो गई।

इस दर्द के बाद 2019 में उन्होंने ‘थाईलैंड वर्ल्ड चैंपियनशिप’ में चौथे नंबर पर आकर धमाकेदार वापसी की, 2019 में उन्होंने पहली बार 200 किलो से भी ज्यादा वजन उठा खुद का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इतना वजन उन्होंने इससे पहले कभी नहीं उठाया था तो इस बार उन्होंने सबसे ज्यादा वजन उठा खुद का रिकॉर्ड ही तोड़ दिया। (मीराबाई चानू के खेल में रिकॉर्ड)

मीराबाई ने बनाया नया रिकॉर्ड

24 जुलाई 2021 को मीराबाई ने टोक्यो ओलंपिक में एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में रजत पदक प्राप्त कर नया रिकॉर्ड बनाया है, इन्होंने स्नैच में 86 किलोग्राम का भार उठाया और बाद में क्लीन एंड जर्क में 119 किलोग्राम का भार उठा वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। क्लीन एंड जर्क में पहले 118 किलोग्राम का रिकॉर्ड था जिसे इन्होंने तोड़ते हुए 119 किलोग्राम का नया रिकॉर्ड बना दिया। (टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई चानू) इस वक्त वे तीसरे स्थान पर रही व उन्होंने कुल 205 किलोग्राम भार उठाया था।

सम्मान तथा पुरस्कार

✓• ग्लास्गो कॉमनवेल्थ में 2014 में रजत पदक जीता।

✓• 48 किलोग्राम की केटेगरी में 2014 में 19 कांस्य पदक, 30 रजत पदक, व 15 स्वर्ण पदक प्राप्त किए।

✓• 12वीं साउथ एशियन खेल गुवाहाटी में 2016 में 48 किलोग्राम की केटेगरी में स्वर्ण पदक प्राप्त किया।

✓• 2016 में हुए रियो ओलंपिक में इनका चयन हुआ परंतु इनके हाथ एकाएक रुक जाने से इनका प्रदर्शन खास नहीं रहा ।

✓• 48 किलोग्राम की केटेगरी में वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 2017 में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। (मीराबाई चानू को मिले सम्मान)

✓• कॉमनवेल्थ गेम्स में 2018 में स्वर्ण पदक जीता।

✓• खेलों में अच्छा प्रदर्शन देने के लिए मणिपुर के मुख्यमंत्री ने 2000000 रुपए की राशि प्रदान की।

✓• टोक्यो ओलंपिक में 50 किलोग्राम की केटेगरी में 2021 में रजत पदक अपने नाम कर नया रिकॉर्ड बनाया है ।

✓• भारत सरकार द्वारा ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया है ।

✓• ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ से पुरस्कृत किया गया।

प्रमुख तथ्य

◆ मीराबाई की लंबाई 5 फीट के लगभग है व इनका वजन 48 किलोग्राम है।

◆ मीराबाई मांसाहारी है। (मीराबाई चानू इंर्पोटेंट प्वाइंट्स)

◆ मीराबाई को डांस करना पसंद है ।

◆ उन्होंने अब तक विवाह नहीं किया क्योंकि उनका मानना है कि विवाह के बाद वे अपने लक्ष्य से भटक सकती है।

◆ मीराबाई का परिवार इतना गरीब था कि उन्हे ट्रेनिंग के दौरान पूरा दूध तथा मांस खाने को नहीं मिलता था जो कि दूसरे साथियों के लिए कॉमन था।

◆ उन्हें रोजाना वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग लेने अपने घर से 50 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। (भारतीय एथलीट मीराबाई चानू)

FAQ

मीराबाई चानू का जन्म कब हुआ?

साईखोम मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर में हुआ।

मीराबाई की कोच कौन है?

इनकी कोच कुंजरानी देवी है।

क्या मीराबाई चानू विवाहित है?

अब तक उन्होंने विवाह नहीं किया है।

इन्होंने खुद की का रिकॉर्ड कब तोड़ा?

पहली बार सबसे ज्यादा 200 किलोग्राम भार उठा 2019 में खुद का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई किस स्थान पर रही?

2021 में टोक्यो ओलंपिक में कुल 205 किलोग्राम भार उठा तीसरे स्थान पर रही और रजत पदक जीता।

तो दोस्तों, आज हमने मीराबाई चानू के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की है किस तरह एक बार हार जाने के बाद भी उन्होंने कोई आस नहीं छोड़ी और कड़ी मेहनत करती रही और एक दिन भारत का और अपना नाम रोशन किया। हमें भी मीराबाई से सीख लेनी चाहिए कि चाहे कितनी भी मुसीबतें आ जाए और हम कितनी भी बार हार जाए

लेकिन हम अपना नाम बनाना चाहे तो अपनी मंजिल पा सकते है। आपको हमारा लेख Meera Bai Chanu Biography In Hindi कैसा लगा कमेंट कर जरूर बताएं और अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें ताकि उन्हें भी इस भारतीय खिलाड़ी के बारे में जानकारी प्राप्त हो पाए।

Tushar Shrimali Jivani jano के लिए Content लिखते हैं। इन्हें इतिहास और लोगों की जीवनी (Biography) जानने का शौक हैं। इसलिए लोगों की जीवनी से जुड़ी जानकारी यहाँ शेयर करते हैं।

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