भारत की प्रथम महिला ‘स्टार वन हॉर्स राइडर’ साइमा सैयद का जीवन परिचय

नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करने वाले हैं भारत की प्रथम महिला * स्टार वन हॉर्स राइडर’ साइमा सैयद के बारे में जिसने 80 किलोमीटर की एंडोस रेस में बेहतरीन प्रदर्शन कर कांस्य पदक प्राप्त किया है। भारत की पहली महिला हॉर्स राइडर हैं जिन्होंने वन स्टार श्रेणी प्राप्त की और अपना नाम रोशन कर दिया, उन्होंने न सिर्फ अपना नाम रोशन किया बल्कि अपने देश का नाम भी रोशन किया है।

राजस्थान के मारवाड़ में खाटू कस्बे की निवासी ने अपने देश का नाम रोशन कर दिया और इतिहास बना लिया है। उन्हें वंडर वुमन का खिताब भी मिला हुआ है, आज बड़े से बड़े मंत्री गण तथा सांसद एवं प्रसिद्ध लोगों ने साइमा की तारीफ की है। तो दोस्तों, चलिए हम आगे के लेख में राजस्थान की बेटी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त करते हैं।

साइमा सैयद का जीवन परिचय (साइमा का परिवार)

स्टार वन राइडर साइमा सैयद नागौर के खाटू कस्बे में रहती है उनके दादा का नाम सैयद इमामउल हक था जो कि स्वतंत्रता सेनानी थे , उनके पिता का नाम सैयद मोइनुल हक है जो कि कोयंतक (नोका विहार) एशियाई क्वालीफायर रह चुके हैं। उनके दो भाई हैं जिनमें एक जुनैद सैयद राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज थे और कई मेडल जीत चुके हैं तथा दूसरा भाई राजस्थान पुलिस की निशानेबाज टीम में है। (साइमा सैयद का परिवार)

उनकी माता कुशल ग्रहणी है जो कि साइमा की काफी मदद करती रहती है। इन सभी के अलावा उनके परिवार में उनकी दो बहने भी हैं जिनके नाम मसीरा सैयद और सारा सैयद है, सारा राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज है एवं मसीरा राष्ट्रीय स्तर के सॉफ्टबॉल खिलाड़ी रह चुकी है। उनके परिवार में लड़के और लड़कियों में कोई भेद नहीं किया जाता तथा दोनों को समान अवसर दिए जाते हैं। साइमा को आज जो प्रसिद्धि मिली है उनमें उनके परिवार का अहम योगदान है। (saima’s family)

साइमा का बचपन

साइमा वीरों की धरती राजस्थान की बेटी है वह नागौर जिले में एक छोटे से कस्बे खाटू में अपने परिवार के साथ रहती है। वे अपने पिताजी को अपना आदर्श मानती है तथा उन्हीं से साइमा ने घुड़सवारी करना भी सीखा है। वे अपने परिवार से आगे बढ़ने की प्रेरणा लेती रहती है उनके परिवार में ज्यादा सदस्य खेलों से जुड़े हुए हैं एवं उन सभी की बुलंदी को देखकर साइमा ने भी खेल में करियर बनाने की सोची। (saima sayed’s childhood) उनके परिवार में 7 नेशनल प्लेयर हैं।

उन्हें बचपन से ही अपने चारों और खेल का वातावरण देखने को मिला उन्होंने अपना पहला पदक 100 मीटर की रेस में एथलेटिक्स में मात्र 10 वर्ष की आयु में प्राप्त किया उसके बाद उन्होंने कई पदक प्राप्त किए हैं। वे बचपन से ही घुड़सवारी करने लगी तथा घोड़ों को दौड़ना, घोड़े को काबू में रखना यह सब उन्हें बड़े अच्छे से आता है। (साइमा सैयद का बचपन) उन्होंने बचपन में हॉर्स राइडिंग करना शुरू कर दिया तथा कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर जीत भी प्राप्त की है।

साइमा का घुड़सवारी में करियर

साइमा ने राइडिंग की शुरुआत मयूर चौपाल स्कूल से कि उसके बाद एचआरवी स्टेबल्स से प्रैक्टिस की और अपनी घुड़सवारी में और ज्यादा निखार लाने के लिए बे पुणे गई और जीएन खान सर से घुड़सवारी का अभ्यास किया। वे पूरे भारत में अभ्यास कर घुड़सवारी में पारंगत हो चुकी है (स्टार वन राइडर साइमा) वे जहां भी अभ्यास करने गई उन्हें हर जगह काफी अच्छे लोग मिले जिन्होंने उनकी गलतियों को सुधारा और उन में निखार लाएं आज उन सभी के कारण सायमा इस मुकाम पर पहुंच पाई है और साइमा का कठिन परिश्रम भी इस जीत के लिए अहम भूमिका रखता है।

उनके घुड़सवारी के करियर में जीत प्राप्त करने के लिए जितना संघर्ष उन्होंने किया उतना ही संघर्ष उनके माता-पिता तथा गुरु ने भी किया है। (साइमा सैयद का संघर्ष) उनकी मां ने घर के काम से दूर रख कर उन्हें अपना करियर बनाने की पूरी छोड़ दी तथा उनके पिता उन्हें घुड़सवारी सिखाते हुए घोड़े के दाने पानी का पूरा ध्यान रखते अभ्यास के दौरान जब भी घोड़ा बेकाबू हो जाता तब उनके पिताजी घोड़े को काबू करते हैं और उनके कठिन परिश्रम का साइमा ने उन्हें बेहद अच्छा फल भी दिया आज पूरा भारत उन्हें सैल्यूट करता है।

क्यों चुनी घुड़सवारी

साइमा के घर पर खेल का वातावरण था तथा उन्हें बचपन से ही खेल खेलना तथा उनमें जीतने का शौक है। वे बचपन में कई खेल खेला करती तथा कई खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर जीत हासिल की है , आज भी बेहतरीन घुड़सवारी के लिए पूरे देश में जानी जाती है। वे कई खेलों में पारंगत है लेकिन दूसरे खेलों में लड़के और लड़कियों को अलग-अलग खेलाया जाता है तथा उनके माप और पैमाने भी अलग-अलग होते हैं। (saima seyad biography in hindi short)

साइना ऐसे खेल में करियर बनाना चाहती थी जहां वह स्वयं को सिद्ध कर सके वह लड़कियों को भी लड़कों के बराबर मानती है । वह घुड़सवारी को एक चैलेंजिंग गेम मानती है और इसी कारण से उन्होंने घुड़सवारी में अपना करियर बनाने की ठान ली। उन्होंने 8 साल की कठिन मेहनत के बाद वे स्टार वन राइडर बन गई तथा वे चाहती हैं कि भारत देश से और कई बेटियां स्टार वन राइडर बने तथा अपना और अपने देश का नाम रोशन करें। (साइमा ने क्यों चुनी घुड़सवारी)

क्या होता है स्टार वन राइडर

स्टार वन राइडर की उपलब्धि हासिल करना बेहद कठिन है जिसके लिए प्रतियोगी को एक 40 किलोमीटर की दूसरी 60 किलोमीटर की तथा उसके बाद दो 80 किलोमीटर की प्रतियोगिताओं को पार करना (क्वालीफाई करना) होता है, (क्या होता है स्टार वन राइडर) इन सभी प्रतियोगिताओं को क्वालीफाई करने वाला प्रतियोगिता स्टार वन बन जाता है। स्टार वन बनने के पश्चात प्रतियोगी एंडोरंस की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकता है।

स्टार वन तक का सफर

छोटे से कस्बे की साइमा को बचपन से ही खेलों में काफी दिलचस्पी थी, उनके परिवार में कुल 7 नेशनल प्लेयर है। उन्होंने 17-18 फरवरी को हुई इन इक्वेस्ट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया और ऑल इंडिया राजस्थानी हॉर्स सोसाइटी के चैप्टर में तत्वावधान में अहमदाबाद में ऑल इंडिया ओपन एक्यूरेट प्रतियोगिता में भाग लिया तथा जीत प्राप्त की। (साइमा सैयद की जीवनी) साइमा ने पहले 40 किलोमीटर की प्रतियोगिता को क्वालीफाई किया और

उसके बाद 60 किलोमीटर की प्रतियोगिता को पार कर लिया इन दोनों प्रतियोगिता को जीतने के बाद साइना ने 80 किलोमीटर की रेस को क्वालीफाई किया इन तीन प्रतियोगिता को क्वालीफाई करने के पश्चात एक और 80 किलोमीटर की प्रतियोगिता को क्वालीफाई कर साइमा स्टार वन राइटर बन गई। स्टार वन राइटर बनने के बाद अब साइमा एंडोरेंस की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकती है।

जीत में अहम योगदान

साइमा ने ‘वंडर वुमन’ का खिताब अपने नाम किया है तथा वे भारत की प्रथम महिला ‘स्टार वन राइडर’ है। उनके इस मुकाम तक पहुंचने में जितना संघर्ष उन्होंने किया उतना ही संघर्ष और कई लोगों ने भी किया तथा साइमा की इस जीत में अपनी अहम भूमिका निभाई है। (युवा पीढ़ी की प्रेरणात्रोत)

साइमा की इस जीत में उनकी माता ने अहम भूमिका निभाई उन्होंने साइमा को घर के कार्यों में व्यस्त रखने की बजाय खेलों में अपना करियर बनाने की पूर्ण स्वतंत्रता दी तथा उनकी ओर से हो सकने वाली सारी सहायता दी है।

उनके पिता उनके आदर्श हैं उन्होंने घुड़सवारी अपने पिता से ही सीखी, जब भी घोड़ा बेकाबू हो जाता उनके पिताजी ही उसे काबू करते तथा घोड़े के खाने-पीने का पूर्ण ख्याल भी वही रखते थे। उनके माता-पिता उन्हें शुरू से ही अपना करियर घुड़सवारी में बनाने के लिए प्रेरित करते रहते तथा हर वक्त उन्हें प्रोत्साहन देते रहते थे।

उनकी इस जीत में उनके माता-पिता के अलावा उनके गुरु का भी अहम योगदान रहा है वह जहां भी अभ्यास करने जाती वहां के गुरु ने उनकी प्रतिभा को निखारा तथा गलतियों को सुधारा है। माता पिता तथा गुरु के अलावा उनके घोड़े ने भी उनकी जीत में अहम भूमिका निभाई है। (India’s first woman horse raider’s biography in hindi)

घोड़े तथा घुड़सवार दोनों की एंडयूरिन प्रतियोगिता में खास भूमिका रहती है। घोड़ा और घुड़सवार दोनों के योगदान से ही विजय प्राप्त होती है यह दोनों एक इकाई ही मानी जाती है। साइमा “अरावली नाम की मारवाड़ी घोड़ी” को अपना साथी चुना तथा ज्यादातर प्रतियोगिता में अरावली के साथ हिस्सा लेकर जीत प्राप्त की है। साइमा की इस जीत में उनके माता-पिता उनके गुरु तथा उनके घोड़े ने अहम भूमिका निभाई है।

मुख्य तथ्य

••• वे रोजाना लगातार 8 घंटे घुड़सवारी का अभ्यास करती है।

••• प्रसिद्ध घुड़सवार एवं राजस्थान इक्वेस्ट्रियन एसोसिएशन के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह ने साइमा की सफलता पर विशेष तारीफ की है। (प्रसिद्ध महिला घुड़सवार साइमा सैयद का जीवन परिचय)

••• साइमा के परिवार से 7 राष्ट्रीय खिलाड़ी है।

••• साइमा कई खेलों में प्रतियोगिताओं में भाग लेती है तथा अब तक वे लगभग 50 पदक जीत चुकी है।

••• साइमा ने 10 साल की उम्र में पहला पदक जीता था।

••• उन्होंने वंडर वुमन का खिताब भी प्राप्त कर रखा है।

तो दोस्तों, आज हमने भारत की प्रथम महिला स्टार वन राइडर साइमा सैयद के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की है उन्हे ‘स्टार वन राइडर’ के साथ ही ‘वंडर वुमन’ का खीताब भी प्राप्त है। उन्होंने मात्र 10 वर्ष की उम्र में ही अपने कैरियर की शुरुआत कर दी और अपना पहला अवार्ड जीत लिया था, उसके बाद जीत का सिलसिला चलता रहा और साइमा ने अब तक कुल 50 पदक प्राप्त किये है।

उनके परिवार ने हर मोड पर उनका साथ दिया, वे आज भी लगातार 8 घंटे तक घुडसवारी का अभ्यास करते थे। हमे भी साइमा से कठिन परिश्रम की तथा उनके परिवार से हर मुकाम पर साथ निभाने की सीख लेनी चाहिए। तो मित्रों, आपको हमारे युवा पीढ़ी के बालको की आदर्श बनने वाली साइमा के बारे में जानकार कैसा लगा कमेंट कर बताए और लेख को लाइक व शेयर करे।

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Tushar Shrimali Jivani jano के लिए Content लिखते हैं। इन्हें इतिहास और लोगों की जीवनी (Biography) जानने का शौक हैं। इसलिए लोगों की जीवनी से जुड़ी जानकारी यहाँ शेयर करते हैं।

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