40+ Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi PDF

अटल बिहारी भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री में से एक है। वे भारत के प्रधानमंत्री के साथ-साथ एक कोमल ह्रदय के कवि भी थे। इनके द्वारा कई कविताएं लिखी गयी है। अटल बिहारी वाजपेयी की कविताये हमेशा हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत रही है। इस पोस्ट में अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखी गयी Top Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi PDF फॉर्मेट में रूप उपलब्ध करवाने जा रहे है।

यदि आप भी अटल बिहारी जी द्वारा लिखी गयी कविताओं को पढ़ने में रूचि रखते है और इन कविताओं को मुँह जुबानी बोलन चाहते है तो इस पोस्ट को शुरू से लेकर अंत तक जरूर पढ़े। साथ ही पोस्ट में दिए गए Download बटन पर क्लिक करके इन कविताओं को निःशुल्क रूप से PDF फॉर्मेट में Download कर सकते है।

Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi PDF Details

Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi PDF
PDF Title Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi PDF
Language Hindi
Category Other
PDF Size 3 MB
Total Pages 76
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PDF Source Kumarsabha.com
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Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi PDF

वज्र से नहीं कठोर अडिग संकल्प सम्पन राजनेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी के कुसुम कोमल ह्रदय से उमड़ पड़ने वाली कविताये गिरी-ह्रदय से फुट निकलने वाली निर्झरियो के सदृश एक ओर जहा अपने दुर्दांत आवेग से किसी भी अवगाहनकर्ता को भ ले जानेमे समर्थ है वही दूसरी ओर वे अपनी निर्मलता, शीतलता और प्राणवता से जीवन के दुर्गम पथ के राहियो की प्यास और थकान को हर एक नई प्रेरणा की संजीवनी प्रदान करने की क्षमता से भी सम्पन्न है।

इनका सहज स्वर तो देशभक्ति पूर्ण शौर्य का ही है किन्तु कभी-कभी नव सर्जना की वेदना से ओत-प्रोत करुणा की रागिनी को भी ये ध्वनित करते है। ऐसा विचित्र हो गया है अपने देश का वर्तमान कि उस पर हसना सम्भव नहीं और रोना तो अटल जी जानते ही नहीं।

अटलजी के मुख से उनकी कविताओं को सुन पाना निश्चय ही दुर्लभ उपलब्ध है। इसकी स्मृति की स्थायी बनाने के लिए अटलजी के काव्य कृतित्व की एक झलक इस पोस्ट में प्रस्तुत की गयी है। इस पोस्ट में PDF फॉर्मेट में अटलजी की सभी कविताओं का संकलन किया गया है, जिसे आप निःशुल्क रूप से पढ़ सकते है।

कविता संग्रह सूचि

  1. आज सिंधु में ज्वार उठा है
  2. जम्मू की पुकार
  3. अमर आग है
  4. हिन्दू तनमन,हिन्दू जीवन है।
  5. स्वतन्त्रता दिवस की पुकार
  6. कोटि चरण बढ़ रहे
  7. आज कहे चाहे कुछ दुनिया
  8. आये जिस-जिस की हिम्मत हो
  9. गीत नहीं गाता हु
  10. सपना टूट गया
  11. आओ फिर से दिया जलाये
  12. गीत नया गाता हु
  13. दूर कही कोई रोता है
  14. जीवन की ढलने लगी साँझ
  15. मातृ पूजा प्रतिबंधित
  16. अंतर्द्वंध
  17. कौरव कौन, कौन पांडव
  18. उचाई
  19. पहचान
  20. न मै चुप हु, न मै गाता हु
  21. दूध में दरार पड़ गयी
  22. हरी हरी दुब पर
  23. जंग न होने देंगे
  24. रोते-रोते रात सो गयी
  25. राह कौनसी जाऊ मै
  26. जीवन बीत चला
  27. ६२वी वर्षगाँठ पर
  28. ६८वे जन्म दिवस पर
  29. अंग्रेजी के गढ़ को तोडा
  30. अनुशासन पर्व
  31. गुंजी हिंदी
  32. पुनः चमकेगा दिनकर
  33. कदम मिलाकर चलना होगा
  34. गगन में लहराता है भगवा हमारा
  35. झुक नहीं सकते
  36. उनकी याद करे
  37. देखो हम बढ़ते ही जाते
  38. पड़ोसी से
  39. नई गाँठ लगनी
  40. ठन गयी
  41. मै सोचने लगता हूँ
  42. यही प्रश्न

आज सिंधु में ज्वार उठा है

आज सिंधु में ज्वार उठा है,
नगपति फिर ललकार उठा है,
कुरुक्षेत्र के कण–कण से फिर,
पांचजन्य हुँकार उठा है।

शत–शत आघातों को सहकर,
जीवित हिंदुस्थान हमारा,
जग के मस्तक पर रोली-सा,
शोभित हिंदुस्थान हमारा।

दुनियाँ का इतिहास पूछता,
रोम कहाँ, यूनान कहाँ है?
घर–घर में शुभ अग्नि जलाता,
वह उन्नत ईरान कहाँ है?

दीप बुझे पश्चिमी गगन के,
व्याप्त हुआ बर्बर अँधियारा,
किंतु चीरकर तम की छाती,
चमका हिंदुस्थान हमारा।

हमने उर का स्नेह लुटाकर,
पीड़ित ईरानी पाले हैं,
निज जीवन की ज्योति जला,
मानवता के दीपक बाले हैं।

जग को अमृत का घट देकर,
हमने विष का पान किया था,
मानवता के लिये हर्ष से,
अस्थि–वज्र का दान दिया था।

जब पश्चिम ने वन–फल खाकर,
छाल पहनकर लाज बचाई,
तब भारत से साम गान का,
स्वर्गिक स्वर था दिया सुनाई।

अज्ञानी मानव को हमने,
दिव्य ज्ञान का दान दिया था,
अम्बर के ललाट को चूमा,
अतल सिंधु को छान लिया था।

साक्षी है इतिहास, प्रकृति का,
तब से अनुपम अभिनय होता,
पूरब से उगता है सूरज,
पश्चिम के तम में लय होता।

विश्व गगन पर अगणित गौरव,
के दीपक अब भी जलते हैं,
कोटि–कोटि नयनों में स्वर्णिम,
युग के शत–सपने पलते हैं।

किन्तु आज पुत्रों के शोणित से,
रंजित वसुधा की छाती,
टुकड़े-टुकड़े हुई विभाजित,
बलिदानी पुरखों की थाती।

कण-कण पर शोणित बिखरा है,
पग-पग पर माथे की रोली,
इधर मनी सुख की दीवाली,
और उधर जन-धन की होली।

मांगों का सिंदूर, चिता की
भस्म बना, हां-हां खाता है,
अगणित जीवन-दीप बुझाता,
पापों का झोंका आता है।

झेलम की लहरें पुकारती,
यूनानी का रक्त दिखाकर,
चन्द्रगुप्त को है गुहारती।

रो-रोकर पंजाब पूछता,
किसने है दोआब बनाया?
किसने मंदिर-गुरुद्वारों को,
अधर्म का अंगार दिखाया?

खड़े देहली पर हो,
किसने पौरुष को ललकारा?
किसने पापी हाथ बढ़ाकर
माँ का मुकुट उतारा?

खड़े देहली पर हो,
किसने पौरुष को ललकारा?
किसने पापी हाथ बढ़ाकर
माँ का मुकुट उतारा?

काश्मीर के नंदन वन को,
किसने है सुलगाया?
किसने छाती पर,
अन्यायों का अम्बार लगाया?

आंख खोलकर देखो! घर में
भीषण आग लगी है,
धर्म, सभ्यता, संस्कृति खाने,
दानव क्षुधा जगी है।

हिन्दू कहने में शर्माते,
दूध लजाते, लाज न आती,
घोर पतन है, अपनी माँ को,
माँ कहने में फटती छाती।

जिसने रक्त पीला कर पाला,
क्षण-भर उसकी ओर निहारो,
सूनी-सूनी मांग निहारो,
बिखरे-बिखरे केश निहारो।जब तक दु:शासन है,
वेणी कैसे बंध सकती,
कोटि-कोटि संतति है,
माँ की लाज न सकती है।

यदि आप अटल बिहारी जी की सभी कविताये पढ़ना चाहते है तो पोस्ट में उपलब्ध PDF Download कर सकते है, जिसके अंतर्गत आपको अटल जी की 40 से अधिक कविताये उपलब्ध करवाई गयी है।

FAQs

Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi PDF Free Download कैसे करे?

यदि आप अटलजी की सभी कविताओं को निःशुल्क रूप से PDF फॉर्मेट में डाउनलोड करना चाहते है तो पोस्ट में दिए गए Download बटन पर क्लिक करे।

CONCLUSION :-

इस पोस्ट में Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi PDF में उपलब्ध करवाई गयी है। उम्मीद करते है कि अटल जी की कविताओं को PDF फॉर्मेट में Download करने में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं हुई होगी।

आशा करते है कि यह पोस्ट आपको जरूर पसंद आयी होगी। यदि आपको Atal Bihari Vajpayee Kavita in Hindi PDF Download करने में किस भी प्रकार की समस्या आ रही हो तो कमेंट करके जरूर बताये। साथ ही मेरी 51 कविताएं pdf पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे।

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