Ram Stuti PDF in Hindi | Download Free [2024]

दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम आपको Ram Stuti PDF निःशुल्क रुप से उपलब्ध करवाने जा रहे है, जिसे आप पोस्ट में दिए गए Download Link की सहायता से आसानी से फ्री में Download कर सकते है।

यदि आप बजरंबली के भक्त है और आप अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए उन्हें प्रसन्न करना चाहते तो आपको राम स्तुति का पाठ अवश्य ही करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि यदि आप बजरंबली की पूजा से पूर्व भगवान राम की इस स्तुति का पाठ करते है तो हनुमान जी की विशेष कृपा और आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहता है।

इस पोस्ट में हम आपको राम स्तुति पाठ PDF फॉर्मेट में उपलब्ध करवाने जा रहे है, साथ ही इस पाठ से होने वाले लाभ और इसका आपके जीवन में क्या महत्व है, इसके बारे में जानकारी प्रदान करने वाले है। यदि आप राम स्तुति का पाठ करना चाहते है तो इस पोस्ट को शुरू से लेकर अंत तक जरूर पढ़े।

Ram Stuti PDF Details

PDF Title Ram Stuti Lyrics in Hindi
Language Hindi
Category Religion
PDF Size 24 KB
Total Pages 1
Download Link Available
PDF Source PANOTBOOK
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Ram Stuti Lyrics in Hindi PDF

Ram Stuti PDF

श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन हरण भव भयदारुणं।

नवकंज-लोचन, कंज-मुख, कर-कंज पद कन्जारुणं।।

कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील-नीरज सुन्दरं।

पट पीत मानहु तड़ित रूचि शुचि नौमि जनक सुतावरं।।

भजु दीनबंधु दिनेश दानव-दैत्यवंश-निकंदनं।

रघुनंद आनंदकंद कोशलचंद दशरथ-नन्दनं।।

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।

आजानुभुज शर-चाप-धर, संग्राम-जित-खरधूषणं।।

इति वदति तुलसीदास शंकर-शेष-मुनि-मन-रंजनं।

मम ह्रदय-कंज निवास कुरु, कामादी खल-दल-गंजनं।।

छंद :-

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो।

करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो।।

एहि भांती गौरि असीस सुनी सिय सहित हियं हरषीं अली।

तुलसी भवानिही पूजि पुनी पुनी मुदित मन मंदिर चली।

।।सोरठा।।

जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।

मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे।।।।

सियावर रामचंद्र की जय।।

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन अर्थ सहित

श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं ।।

नवकंज-लोचन, कंज-मुख, कर-कंज पद कंजारुणं ।।१।।

हे मन ! कृपालु (कृपा करनेवाले, दया करनेवाले) श्रीरामचंद्रजी का भजन कर, वे संसार के जन्म-मरण रूप दारुण (कठोर, भीषण) भय को दूर करने वाले है । उनके नेत्र नव-विकसित कमल के समान है । उनके मुख-हाथ और चरण भी लालकमल के समान हैं ॥१॥

कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरम । 

पट पीत मानहु तड़ित रूचि-शुची, नौमी जनक सुतावरं ॥२॥

उनके सौंदर्य की छ्टा अगणित (असंख्य, अनगिनत) कामदेवो से बढ़कर है । उनके शरीर का नवीन नील-सजल मेघ के जैसा सुंदर वर्ण है । पीताम्बर मेघरूप शरीर मानो बिजली के समान चमक रहा है । ऐसे पावनरूप जानकीपति श्रीरामजी को मै नमस्कार करता हूँ ॥२॥

भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं । 

रघुनंद आनंद कंद कोशल चन्द्र दशरथ नंदनम ॥३॥

हे मन ! दीनों के बंधू, सुर्य के समान तेजस्वी, दानव और दैत्यो के वंश का समूल नाश करने वाले, आनन्दकंद, कोशल-देशरूपी आकाश मे निर्मल चंद्र्मा के समान, दशरथनंदन श्रीराम का भजन कर ॥३॥

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु अंग विभुषणं । 

आजानुभुज शर चाप-धर, संग्राम-जित खरदूषणं ॥४॥

जिनके मस्तक पर रत्नजडित मुकुट, कानों में कुण्डल, भाल पर तिलक और प्रत्येक अंग मे सुंदर आभूषण सुशोभित हो रहे है । जिनकी भुजाएँ घुटनों तक लम्बी है । जो धनुष-बाण लिये हुए है, जिन्होने संग्राम में खर-दूषण को जीत लिया है ॥४॥

इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि-मन-रंजनं । 

मम ह्रदय कंज निवास कुरु, कामादि खल-दल गंजनं ॥५॥

तुलसीदास प्रार्थना करते हैं कि जो शिव, शेषजी और मुनियों के मन को प्रसन्न करने वाले और काम, क्रोध, लोभादि शत्रुओं का नाश करने वाले हैं ।  वे श्रीरघुनाथजी मेरे ह्रदय कमल में सदा निवास करे ॥५॥

मनु जाहि राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरो । 

करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ॥६॥

जिसमें तुम्हारा मन अनुरक्त हो गया है, वही स्वभाव से ही सुंदर साँवला वर (श्रीरामचंद्रजी) तुमको मिलेंगे । वह करुणा निधान (दया का खजाना) और सुजान (सर्वग्य, सब जाननेवाला) है, शीलवान है । तुम्हारे स्नेह को जानता है ॥६॥

एही भांति गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषीं अली । 

तुलसी भावानिः पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली ॥७॥

इस प्रकार श्रीगौरीजी का आशीर्वाद सुनकर जानकीजी समेत सभी सखियाँ ह्रदय मे हर्षित हुई । तुलसीदासजी कहते हैं- भवानीजी को बार-बार पूजकर सीताजी प्रसन्न मन से राजमहल को लौट चली ॥७॥

जानी गौरी अनुकूल, सिय हिय हरषु न जाइ कहि ।

मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ॥८॥

गौरीजी को अनुकूल जानकर सीताजी के ह्रदय में जो हर्ष हुआ वह कहा नही जा सकता । सुंदर मंगलो के मूल उनके बाये अंग फडकने लगे ॥८॥

श्री राम की उपासना करने के लिए पुस्तक

यदि आप भगवान राम की उपासना करना चाहते है तो यह पुस्तक आपके लिए मददगार साबित होंगी। इस पुस्तक के अंतर्गत भगवान श्री राम की वंदना, पूजा, आरती आदि का संग्रह शामिल किया गया है। यदि आप इस पुस्तक को PDF फॉर्मेट में Download करना चाहते है तो निचे दिए गए Download बटन पर क्लिक करें –

राम स्तुति के पाठ का हमारे जीवन में महत्व

राम स्तुति का पाठ भक्तगण भगवान राम के प्रति अपनी श्रद्धा और उनकी उपासना करने के लिए करते है। राम स्तुति में निहित शब्दों की धुन हमारे आंतरिक मन को शांति और सुख तथा एक विशेष प्रकार की शक्ति प्रदान करती है। इस स्तुति का पाठ करने से राम भक्त हनुमानजी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

एक हिन्दू को रोजाना राम स्तुति का पाठ अवश्य करना चाहिए। हमे अपने धर्म के प्रति आस्था और विश्वास प्राप्त करने के लिए राम स्तुति का पाठ अहम भूमिका निभाता है। राम स्तुति का पाठ भक्ति और आध्यात्मिकता को दर्शाता है। इस गीत के माध्यम से हम भगवान राम की लीलाओं, गुणों, संदेशों और स्वरूप को समझते हैं।

राम स्तुति गीत के फायदे

राम स्तुति का गीत भक्ति और आद्यात्मिक्ता को महत्व देता है। यह गीत हमे भगवान श्री राम उपासना के लिए प्रेरित करता है। यदि आप इस स्तुति का पाठ करते है तो आपको निम्न रूप से फायदे होते है –

  • रोजाना राम स्तुति का पाठ करने से आंतरिक रूप से मन में शान्ति प्राप्त होती है।
  • इस स्तुति के पाठ से आपके अंदर आत्मविश्वास और एक नयी ऊर्जा के रूप में जोश भरा रहता है।
  • राम स्तुति से आपकी आत्मा पवित्र बनी रहती है।
  • इस स्तुति के पाठ से आपके जीवन में दुःख दर्द और संताप कम होते है।
  • राम की उपासना करने से आप अपने जीवन में सफलता और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

FAQs:- Shri Ram Stuti PDF

Ram Stuti PDF मुफ्त में कैसे Download करें?

दोस्तों यदि आप भगवान श्री राम की उपासना के लिए राम स्तुति PDF फॉर्मेट में डाउनलोड करना चाहते है तो पोस्ट में दिए गए डाउनलोड बटन पर क्लिक करके आसानी से फ्री में Download कर सकते है।

क्या हम रोज राम स्तुति पढ़ सकते हैं?

हा, आप रोजाना इस स्तुति का पाठ कर सकते है। जिससे आपको कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते है। रोजाना राम स्तुति का पाठ करने से तनाव दूर करता है, एकाग्रता और फोकस में सुधार आता है। राम स्तुति स्वास्थ्य में भी सुधार करती है।

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम् कौन सा छंद है?

उपरोक्त पद्यांश में हरिगीतिका छन्द है। 

Conclusion:-

इस पोस्ट में Ram Stuti PDF मुफ्त में उपलब्ध करवाई गयी है। साथ ही इस स्तुति का हमारे जीवन में क्या महत्व है तथा इस स्तुति के पाठ से होनेवाले लाभ के बारे में जानकारी प्रदान की गयी है। उम्मीद करते है कि Ram Stuti in Hindi PDF Download करने में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं हुई होगी।

यह पोस्ट आपको जरूर पसंद आयी होगी। यदि आपको Shree Ram Stuti PDF Download करने में किसी भी प्रकार की समस्या आ रही हो तो कमेंट करके जरूर बताये। साथ ही इस पोस्ट को अधिक से अधिक संख्या में रामभक्तो के साथ अवश्य ही शेयर करें।

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